सोमवर व्रत का धार्मिक महत्व
हिंदू धर्म में सोमवार का विशेष धार्मिक महत्व है। यह दिन भगवान शिव को समर्पित माना जाता है, जिन्हें संहारक, कल्याणकारी और भक्तों पर शीघ्र प्रसन्न होने वाला देव कहा गया है। सोमवार व्रत रखकर श्रद्धालु भगवान शिव की आराधना करते हैं और उनसे सुख, शांति व मनोकामना पूर्ति की कामना करते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सोमवार व्रत करने से व्यक्ति के जीवन में आने वाले कष्ट दूर होते हैं। शिव पुराण और अन्य धार्मिक ग्रंथों में उल्लेख मिलता है कि सच्चे मन से किया गया सोमवर व्रत भगवान शिव को अत्यंत प्रिय होता है। इस व्रत के प्रभाव से मानसिक तनाव, पारिवारिक कलह और आर्थिक परेशानियाँ कम होती हैं।
सोमवार व्रत का विशेष महत्व विवाह और दांपत्य जीवन से भी जुड़ा है। अविवाहित कन्याएँ योग्य वर की प्राप्ति के लिए यह व्रत करती हैं, जबकि विवाहित स्त्रियाँ अपने पति की दीर्घायु और दांपत्य सुख के लिए सोमवर व्रत रखती हैं। मान्यता है कि माता पार्वती ने भी भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए सोमवार व्रत किया था।
इस व्रत में प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण किए जाते हैं, शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र और धतूरा अर्पित किया जाता है तथा “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप किया जाता है। दिनभर सात्त्विक आचरण और संयम का पालन करना व्रत का मुख्य अंग माना जाता है।
इस प्रकार, सोमवार व्रत न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह आत्मशुद्धि, भक्ति और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग भी प्रशस्त करता है। भगवान शिव की कृपा से जीवन में संतुलन, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। 🙏
भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है
मनोकामनाएँ पूर्ण होने की मान्यता
मानसिक शांति और तनाव में कमी
जीवन के कष्ट और बाधाएँ दूर होती हैं
अविवाहितों को योग्य जीवनसाथी की प्राप्ति
दांपत्य जीवन में सुख और मधुरता
पति की दीर्घायु के लिए लाभकारी
पारिवारिक कलह और नकारात्मकता दूर होती है
आर्थिक समस्याओं में कमी आती है
रोग, भय और दोषों से मुक्ति
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