संतोषी माता का पावन व्रत
- प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- घर के पूजा स्थल में संतोषी माता की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
- माता को गुड़ और चने का भोग अर्पित करें।
- माता के सामने दीपक जलाएँ।
- श्रद्धा से संतोषी माता की व्रत कथा का पाठ करें या सुनें।
- अंत में माता से व्रत पूर्ण करने का संकल्प लें।
- शाम को पुनः पूजा कर आरती करें।
व्रत के नियम
- व्रत के दिन खट्टा पदार्थ (जैसे नींबू, इमली, अचार, दही) पूरी तरह वर्जित होता है।
- भोजन में सात्विक आहार लें।
- क्रोध, झूठ और नकारात्मक विचारों से बचें।
- पूरे व्रत काल में संतोष और धैर्य बनाए रखें।
संतोषी माता की व्रत कथा (संक्षेप में)
एक निर्धन परिवार की बहू ने श्रद्धा से संतोषी माता का व्रत किया। सास-ननद के अत्याचार सहते हुए भी उसने खट्टा त्याग कर व्रत पूर्ण किया। माता की कृपा से उसे सुख, सम्मान और समृद्धि प्राप्त हुई। अंत में अत्याचार करने वालों को भी अपनी गलती का एहसास हुआ। यह कथा सिखाती है कि सच्ची श्रद्धा और संतोष से माता अवश्य कृपा करती हैं।
व्रत का महत्व
- यह व्रत घरेलू कलह, आर्थिक संकट और मानसिक अशांति को दूर करता है।
- विवाह में आ रही बाधाएँ दूर होती हैं।
- संतान सुख, धन-लाभ और पारिवारिक शांति मिलती है।
- जीवन में संतोष और सकारात्मकता आती है।
व्रत का उद्यापन
- अंतिम शुक्रवार को उद्यापन किया जाता है।
- गुड़-चना, खीर या मीठा प्रसाद बनाकर ब्राह्मण या कन्याओं को भोजन कराएँ।
- माता से व्रत पूर्ण होने की प्रार्थना करें।
- कथा सुनाना और दान देना शुभ माना जाता है।
संतोषी माता का संदेश
संतोषी माता का व्रत हमें यह सिखाता है कि
संतोष, श्रद्धा और संयम से जीवन की हर कठिनाई दूर की जा सकती है।
बृहस्पतिवार पर दीपक जलाने से पहले जान लें शुभ दिशा
