शनिवार के दिन शनिदेव की पूजा में काले तिल के तेल अर्पण का सही तरीका
1. काले तिल के तेल का धार्मिक महत्व
शनिदेव को काला तिल और तिल का तेल अत्यंत प्रिय है। शनि ग्रह कर्म, न्याय और अनुशासन के देवता हैं। काले तिल का तेल अर्पण करने से
- शनि दोष शांत होता है
- साढ़ेसाती और ढैय्या के प्रभाव में कमी आती है
- जीवन में चल रही बाधाएँ और कष्ट धीरे-धीरे दूर होते हैं
काले तिल का तेल अज्ञान, भय और नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है।
2. तेल अर्पण के लिए शुभ समय
- शनिवार का दिन, विशेष रूप से
- सूर्योदय के बाद
- या सूर्यास्त से पहले
- अमावस्या या शनिवार + अमावस्या का संयोग अत्यंत शुभ माना जाता है।
पूजा के समय मन शांत और श्रद्धा भाव से भरा होना चाहिए।
3. पूजा से पहले आवश्यक तैयारी
तेल अर्पण से पहले निम्न तैयारी करें:
- प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें
- काले या गहरे नीले वस्त्र शुभ माने जाते हैं
- मन में किसी के प्रति द्वेष या क्रोध न रखें
- पूजा स्थल को साफ करें
- तांबे या लोहे के पात्र में शुद्ध काले तिल का तेल रखें
4. शनिदेव की प्रतिमा या चित्र की स्थापना
- पूजा स्थल पर शनिदेव की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें
- यदि संभव हो तो लोहे की मूर्ति उत्तम मानी जाती है
- प्रतिमा का मुख पूर्व या पश्चिम दिशा में रखें
5. काले तिल के तेल से दीपक जलाने की विधि
तेल अर्पण का सबसे श्रेष्ठ तरीका दीपक के माध्यम से माना गया है:
- लोहे या मिट्टी का दीपक लें
- उसमें रुई की बाती रखें
- काले तिल का तेल भरें
- दीपक को शनिदेव के सामने जलाएँ
दीपक जलाते समय यह मंत्र बोलें:
मंत्र:
ॐ शं शनैश्चराय नमः
इस मंत्र का 108 बार या कम से कम 11 बार जाप करें।
6. सीधे तेल चढ़ाने की विधि (विशेष स्थिति में)
यदि मंदिर में शनिदेव की मूर्ति हो, तो:
- तेल को सीधे मूर्ति पर न उड़ेलें
- तेल को पात्र में लेकर मूर्ति के सामने रखें
- कुछ बूंदें चरणों के पास अर्पित करें
घर में पूजा के समय भी यही विधि अपनाएँ।
7. काले तिल के साथ तेल अर्पण
तेल अर्पण के साथ यदि संभव हो तो:
- थोड़े काले तिल भी अर्पित करें
- काले तिल को हाथ में लेकर मनोकामना करें
- फिर दीपक के पास या मूर्ति के सामने रखें
8. तेल अर्पण के समय ध्यान रखने योग्य बातें
- तेल अर्पण करते समय पीठ न करें
- शनिदेव की आंखों में सीधे न देखें
- जल्दबाजी या हंसी-मजाक न करें
- अपवित्र अवस्था में पूजा न करें
- तेल गिर जाए तो उसे पैरों से न रौंदें
9. दान का महत्व
तेल अर्पण के बाद दान करने से पूजा पूर्ण होती है:
- काला तिल
- सरसों का तेल
- काले वस्त्र
- लोहे का पात्र
- गरीब, वृद्ध या श्रमिक को दान करें
10. पूजा के बाद की विधि
- शनिदेव की आरती करें
- क्षमा प्रार्थना करें
- सबके लिए मंगल कामना करें
- घर लौटते समय पीछे मुड़कर न देखें (मंदिर में)
11. तेल अर्पण से प्राप्त होने वाले लाभ
- शनि की कृपा प्राप्त होती है
- कर्मों के दोष धीरे-धीरे कटते हैं
- नौकरी, व्यापार और स्वास्थ्य में सुधार
- भय, तनाव और मानसिक कष्ट कम होते हैं
12. विशेष सावधानी
शनिदेव कर्म के देवता हैं। केवल तेल अर्पण से नहीं, अच्छे कर्म से ही पूर्ण कृपा मिलती है।
सत्य, परिश्रम, सेवा और संयम — यही शनि की सबसे बड़ी पूजा है।
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