कष्ट निवारण में सोमवर व्रत की भूमिका
हिंदू धर्म में सोमवार व्रत को कष्ट निवारण का प्रभावशाली साधन माना गया है। यह व्रत भगवान शिव को समर्पित होता है, जिन्हें आशुतोष कहा जाता है—अर्थात जो शीघ्र प्रसन्न होकर अपने भक्तों के दुःख हर लेते हैं। श्रद्धा और नियमपूर्वक किया गया सोमवर व्रत जीवन के अनेक प्रकार के कष्टों से मुक्ति दिलाने में सहायक माना जाता है।
मान्यता है कि सोमवार व्रत करने से मानसिक तनाव, भय, चिंता और अवसाद जैसे मानसिक कष्ट दूर होते हैं। “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप और शिवलिंग पर जलाभिषेक मन को शांति प्रदान करता है और नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है। इससे व्यक्ति को आत्मबल और धैर्य की प्राप्ति होती है।
शारीरिक और पारिवारिक कष्टों के निवारण में भी सोमवर व्रत की विशेष भूमिका मानी जाती है। रोग, पारिवारिक कलह, आर्थिक संकट और जीवन में बार-बार आने वाली बाधाओं से राहत के लिए भक्त सोमवर व्रत रखते हैं। धार्मिक विश्वास के अनुसार, शिव कृपा से दुर्भाग्य दूर होता है और जीवन में स्थिरता आती है।
ज्योतिषीय दृष्टि से भी सोमवार व्रत का महत्व है। यह व्रत चंद्र ग्रह से संबंधित दोषों—जैसे मानसिक अस्थिरता, भावनात्मक कमजोरी और मन की चंचलता—को शांत करने में सहायक माना जाता है। चंद्रमा मन का कारक है और शिव चंद्रधारी हैं, इसलिए यह व्रत मानसिक संतुलन प्रदान करता है।
इस प्रकार, सोमवर व्रत आस्था, संयम और भक्ति के माध्यम से कष्ट निवारण का मार्ग प्रशस्त करता है। सच्चे मन से की गई शिव उपासना जीवन के दुखों को कम कर शांति, आशा और सकारात्मकता का संचार करती है। 🙏
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