शुक्रवार व्रत की कथा
शुक्रवार व्रत की कथा (विस्तृत)
प्राचीन समय की बात है। एक नगर में एक अत्यंत गरीब ब्राह्मण परिवार रहता था। परिवार में पति-पत्नी और उनके बच्चे थे। ब्राह्मण अत्यंत ईमानदार, धर्मपरायण और परिश्रमी था, फिर भी उसके घर में हमेशा धन की कमी, दुख और कष्ट बने रहते थे। कई बार ऐसा होता कि घर में भोजन तक के लिए अन्न नहीं होता।
ब्राह्मण की पत्नी बहुत ही संस्कारी, पतिव्रता और धार्मिक थी। वह प्रतिदिन भगवान की पूजा करती और माता लक्ष्मी से प्रार्थना करती कि उसके घर में भी कभी सुख और शांति आए। लेकिन वर्षों तक पूजा करने के बाद भी उनकी स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ।
माता लक्ष्मी का आगमन
एक दिन शुक्रवार के दिन, दोपहर के समय, ब्राह्मण की पत्नी घर की सफ़ाई कर रही थी। तभी एक तेजस्वी स्त्री उनके द्वार पर आई और मधुर स्वर में बोली,
“बहन, क्या मुझे थोड़ा पानी मिलेगा?”
ब्राह्मण की पत्नी ने बिना देर किए उन्हें आदरपूर्वक जल पिलाया और बैठने का आग्रह किया। वह स्त्री वास्तव में माता लक्ष्मी थीं, जो भक्तों की परीक्षा लेने पृथ्वी पर आई थीं।
माता लक्ष्मी ने उससे पूछा,
“बहन, तुम इतनी निर्धन होकर भी हमेशा प्रसन्न और सेवा-भाव वाली क्यों रहती हो?”
ब्राह्मण की पत्नी ने विनम्रता से उत्तर दिया,
“माता, दुख-सुख तो ईश्वर की इच्छा है। पर अतिथि सेवा और धर्म का पालन करना मेरा कर्तव्य है।”
शुक्रवार व्रत का उपदेश
ब्राह्मण की पत्नी की श्रद्धा और सेवा से प्रसन्न होकर माता लक्ष्मी ने अपना वास्तविक स्वरूप प्रकट किया। यह देखकर वह स्त्री भय और आनंद से कांप उठी।
माता लक्ष्मी ने कहा,
“वत्से, तुम्हारे घर की दरिद्रता का कारण यह है कि तुमने शुक्रवार व्रत का महत्व नहीं जाना। यदि तुम श्रद्धा और नियम के साथ शुक्रवार व्रत करो, मेरी पूजा करो और कथा सुनो-सुनाओ, तो तुम्हारे जीवन से सभी कष्ट दूर हो जाएँगे।”
माता लक्ष्मी ने उसे व्रत की विधि, पूजा नियम और कथा विस्तार से समझाई और कहा कि इस व्रत में स्वच्छता, सादगी और विश्वास बहुत आवश्यक है।
व्रत का प्रभाव
माता लक्ष्मी के आदेशानुसार ब्राह्मण की पत्नी ने अगले शुक्रवार से व्रत रखना शुरू किया। वह सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करती, माता लक्ष्मी की पूजा करती, दीप जलाती और श्रद्धा से कथा सुनती।
कुछ ही समय में उनके जीवन में चमत्कारी परिवर्तन होने लगे।
- घर में धन आने लगा
- पति को अच्छा कार्य मिला
- बच्चों का स्वास्थ्य सुधर गया
- घर में सुख-शांति और आनंद रहने लगा
धीरे-धीरे वही गरीब परिवार नगर के सुखी और समृद्ध परिवारों में गिना जाने लगा।
अहंकार का पतन
एक समय ऐसा आया जब ब्राह्मण की पत्नी को अपने धन और वैभव पर अहंकार होने लगा। उसने व्रत और पूजा में लापरवाही शुरू कर दी। परिणामस्वरूप, धीरे-धीरे फिर से घर में परेशानियाँ आने लगीं।
तब उसे अपनी गलती का अहसास हुआ। उसने माता लक्ष्मी से क्षमा माँगी और पुनः पूरे विश्वास के साथ शुक्रवार व्रत प्रारंभ किया। माता लक्ष्मी ने उस पर पुनः कृपा की और उसका घर फिर से सुख-समृद्धि से भर गया।
कथा का संदेश
इस कथा से हमें यह शिक्षा मिलती है कि
- श्रद्धा और नियम से किया गया व्रत अवश्य फल देता है
- धन के साथ विनम्रता आवश्यक है
- माता लक्ष्मी सेवा, शुद्ध मन और विश्वास से प्रसन्न होती हैं
निष्कर्ष
शुक्रवार व्रत की कथा हमें सिखाती है कि सच्ची भक्ति, संयम और आस्था से जीवन की बड़ी-से-बड़ी कठिनाइयाँ भी दूर हो जाती हैं। माता लक्ष्मी की कृपा से घर में धन, सुख, शांति और वैभव बना रहता है
बृहस्पति व्रत कितने समय तक करना चाहिए
