बृहस्पति व्रत कब और क्यों किया जाता है
बृहस्पति व्रत हर सप्ताह गुरुवार के दिन किया जाता है। इसे विशेष रूप से तब आरंभ किया जाता है जब शुक्ल पक्ष का गुरुवार हो। यह व्रत आमतौर पर 16 गुरुवार या 21 गुरुवार तक लगातार किया जाता है। कुछ लोग अपनी मनोकामना पूर्ण होने तक भी इस व्रत को करते हैं।
बृहस्पति व्रत क्यों किया जाता है
बृहस्पति व्रत देवगुरु बृहस्पति को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है। बृहस्पति को ज्ञान, धर्म, धन, विवाह, संतान सुख और भाग्य का कारक ग्रह माना जाता है। इस व्रत को करने के पीछे मुख्य कारण ये हैं:
- कुंडली में गुरु दोष या कमजोर बृहस्पति को शांत करने के लिए
- विवाह में आ रही बाधाएँ दूर करने हेतु
- संतान सुख की प्राप्ति के लिए
- धन, समृद्धि और भाग्य वृद्धि के लिए
- शिक्षा, ज्ञान और बुद्धि में वृद्धि हेतु
- जीवन में सकारात्मकता और स्थिरता लाने के लिए
बृहस्पति व्रत के लाभ
बृहस्पति व्रत श्रद्धा और नियमपूर्वक करने से अनेक आध्यात्मिक और सांसारिक लाभ मिलते हैं:
- कुंडली में बृहस्पति ग्रह मजबूत होता है
- गुरु दोष और अशुभ प्रभावों से मुक्ति मिलती है
- धन, वैभव और समृद्धि में वृद्धि होती है
- विवाह में आ रही बाधाएँ दूर होती हैं
- संतान सुख की प्राप्ति होती है
- शिक्षा, ज्ञान और बुद्धि का विकास होता है
- भाग्य का साथ मिलने लगता है
- नौकरी और व्यापार में उन्नति होती है
- घर में सुख-शांति और सकारात्मक वातावरण बना रहता है
- मानसिक तनाव और भ्रम कम होते हैं
- समाज में मान-सम्मान बढ़ता है
- धार्मिक प्रवृत्ति और सदाचार का विकास होता है
- पारिवारिक कलह में कमी आती है
- आर्थिक समस्याओं से राहत मिलती है
- जीवन में स्थिरता और संतुलन आता है
हनुमान व्रत से जीवन में सुख-शांति
