जया एकादशी व्रत: फलाहार में क्या है सही विकल्प
जया एकादशी व्रत में फलाहार का महत्व
जया एकादशी के दिन अधिकतर श्रद्धालु फलाहार व्रत रखते हैं। फलाहार का अर्थ है—ऐसा भोजन जो हल्का, सात्विक और शुद्ध हो, जिससे शरीर को ऊर्जा मिले और मन भगवान विष्णु की भक्ति में स्थिर रहे। इस दिन अन्न का त्याग कर फल, दूध और व्रत योग्य पदार्थ ग्रहण किए जाते हैं।
जया एकादशी व्रत में फलाहार के सही विकल्प
1. ताजे फल
फलाहार का सबसे शुद्ध और सरल विकल्प फल होते हैं।
उपयुक्त फल:
- सेब
- केला
- अनार
- पपीता
- नाशपाती
- अंगूर
- संतरा
- मौसमी
ये फल तुरंत ऊर्जा देते हैं और पाचन में आसान होते हैं।
ध्यान रखें:
कटे हुए या बासी फल न खाएं।
2. दूध और दूध से बने पदार्थ
फलाहार में दूध को अत्यंत सात्विक माना गया है।
खाने योग्य विकल्प:
- सादा दूध
- दही
- छाछ
- माखन
- पनीर
दूध से बनी चीज़ें शरीर को शक्ति देती हैं और व्रत में कमजोरी नहीं होने देतीं।
3. सूखे मेवे
सूखे मेवे सीमित मात्रा में फलाहार का अच्छा विकल्प हैं।
अनुमेय मेवे:
- बादाम
- काजू
- किशमिश
- अखरोट
- मखाना
ये भूख को नियंत्रित करते हैं और पोषण देते हैं।
4. व्रत वाले आटे और खाद्य पदार्थ
कुछ लोग फल के साथ हल्का व्रत भोजन भी करते हैं।
सही विकल्प:
- साबूदाना
- कुट्टू (कुटू) का आटा
- सिंघाड़े का आटा
- राजगीरा (चौलाई)
इनसे बनी खिचड़ी, टिक्की, पूरी या हलवा फलाहार में लिया जा सकता है।
5. सेंधा नमक
- फलाहार में केवल सेंधा नमक का प्रयोग करें।
- साधारण नमक वर्जित है।
6. पेय पदार्थ (Drinks)
व्रत में शरीर को हाइड्रेट रखना ज़रूरी है।
उचित पेय:
- सादा पानी
- नारियल पानी
- फलों का रस
- दूध
- छाछ
फलाहार में क्या न लें
- चावल, गेहूं, दालें
- साधारण नमक
- प्याज और लहसुन
- चाय, कॉफी
- पैकेट वाला या बासी भोजन
- तामसिक और नशे की वस्तुएं
फलाहार करते समय ध्यान रखने योग्य बातें
- भोजन बनाते समय स्वच्छता और पवित्रता रखें
- भगवान विष्णु को भोग लगाकर ही भोजन करें
- अधिक तला-भुना न खाएं
- फलाहार संयम और श्रद्धा से करें
निष्कर्ष
जया एकादशी व्रत में फलाहार केवल भूख मिटाने का साधन नहीं, बल्कि शरीर और आत्मा की शुद्धि का माध्यम है। सही फलाहार अपनाकर व्रत को सफल और पुण्यदायक बनाया जा सकता है।
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