हनुमान जी की व्रत करने की महिमा
हनुमान जी को संकटमोचन, बजरंगबली और महावीर कहा जाता है। वे शक्ति, भक्ति, बुद्धि और निर्भयता के प्रतीक हैं। शास्त्रों और लोक-मान्यताओं में हनुमान जी के व्रत को अत्यंत फलदायी माना गया है। जो श्रद्धा और नियमपूर्वक हनुमान जी का व्रत करता है, उसके जीवन से अनेक कष्ट दूर हो जाते हैं।
हनुमान जी का व्रत करने से मन की चंचलता शांत होती है और आत्मबल में वृद्धि होती है। यह व्रत व्यक्ति को संयम, ब्रह्मचर्य और अनुशासन का मार्ग दिखाता है। हनुमान जी स्वयं रामभक्त हैं, इसलिए उनका व्रत करने से रामभक्ति और सद्गुणों का विकास होता है।
हनुमान जी को संकटमोचन कहा जाता है। उनके व्रत से जीवन के भय, रोग, शत्रु-बाधा, नकारात्मक शक्तियाँ और मानसिक तनाव दूर होते हैं। विशेष रूप से मंगलवार और शनिवार का व्रत अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है।
मान्यता है कि हनुमान जी का व्रत करने से मंगल दोष, शनि दोष और भूत-प्रेत बाधा का नाश होता है। जिन लोगों को बार-बार डर, स्वप्न-दोष या असफलता का सामना करना पड़ता है, उनके लिए यह व्रत बहुत लाभकारी है।
सच्चे मन और पूर्ण श्रद्धा से किया गया हनुमान व्रत मनोकामनाओं की पूर्ति करता है। नौकरी, व्यापार, स्वास्थ्य, शिक्षा और पारिवारिक सुख के लिए लोग हनुमान जी का व्रत रखते हैं।
व्रत के दिन ब्रह्ममुहूर्त में स्नान कर हनुमान जी की पूजा करें।
हनुमान चालीसा, सुंदरकांड या बजरंग बाण का पाठ करें।
लाल फूल, सिंदूर, गुड़-चना या बूंदी का भोग लगाएँ।
दिनभर सात्विक आचरण रखें और संभव हो तो उपवास करें।
हनुमान जी का व्रत केवल एक धार्मिक क्रिया नहीं, बल्कि आत्मशक्ति, भक्ति और विश्वास को जागृत करने का माध्यम है। जो भक्त श्रद्धा से हनुमान जी का व्रत करता है, उसके जीवन में साहस, सफलता और शांति का वास होता है।
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