पुत्र सप्तमी व्रत 2026: तिथि, विधि और संपूर्ण महत्व
पुत्र सप्तमी व्रत की पूजा विधि
- प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- घर के मंदिर या किसी पवित्र स्थान पर पूजा की तैयारी करें।
- व्रत का संकल्प लें कि आप पुत्र की लंबी आयु और कल्याण के लिए यह व्रत कर रही हैं।
- भगवान शिव और माता पार्वती अथवा भगवान विष्णु की पूजा की जाती है।
- शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, पुष्प और धूप-दीप अर्पित करें।
- पुत्र सप्तमी व्रत की कथा अवश्य सुनें या पढ़ें।
- दिनभर व्रत रखें – कुछ महिलाएं निर्जल व्रत करती हैं, जबकि कुछ फलाहार लेती हैं।
- संध्या समय आरती करें और अगले दिन व्रत का पारण करें।
पुत्र सप्तमी व्रत कथा (संक्षेप में)
पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक समय एक स्त्री के सभी पुत्र अल्पायु में मृत्यु को प्राप्त हो जाते थे। दुःखी होकर उसने ऋषियों से उपाय पूछा। ऋषियों ने उसे पुत्र सप्तमी का व्रत करने की सलाह दी। विधिपूर्वक व्रत करने से उसे भगवान शिव की कृपा प्राप्त हुई और उसके पुत्र दीर्घायु एवं स्वस्थ हुए। तभी से यह व्रत संतान रक्षा और सुख का प्रतीक माना जाता है।
पुत्र सप्तमी व्रत का महत्व
- यह व्रत संतान सुख प्रदान करने वाला माना जाता है।
- पुत्र की लंबी आयु और अच्छे स्वास्थ्य के लिए विशेष फलदायी है।
- मातृत्व भाव, त्याग और तपस्या का प्रतीक है।
- परिवार में सुख, शांति और समृद्धि आती है।
- धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत से संतान पर आने वाले संकट दूर होते हैं।
व्रत में क्या करें और क्या न करें
क्या करें
- मन, वचन और कर्म से पवित्र रहें
- ब्राह्मणों को दान करें
- कथा अवश्य सुनें
क्या न करें
- व्रत के दिन क्रोध और कटु वचन से बचें
- तामसिक भोजन न करें
- नकारात्मक विचार न रखें
पुत्र सप्तमी व्रत का फल
मान्यता है कि जो महिलाएं श्रद्धा और नियमपूर्वक पुत्र सप्तमी व्रत करती हैं, उन्हें संतान सुख की प्राप्ति होती है और उनके पुत्र दीर्घायु, बुद्धिमान और सफल होते हैं।
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