शुक्रवार विशेष: संतोषी माता व्रत कथा
प्राचीन समय की बात है। एक नगर में एक निर्धन किंतु संस्कारी महिला रहती थी। वह अत्यंत श्रद्धा और संतोष से जीवन व्यतीत करती थी। उसके घर में अभाव थे, परंतु उसने कभी अधर्म का मार्ग नहीं अपनाया।
एक दिन उसे किसी साध्वी से संतोषी माता के शुक्रवार व्रत के बारे में पता चला। साध्वी ने कहा—
“जो भी स्त्री श्रद्धा से शुक्रवार का व्रत करती है, खट्टे का त्याग करती है और माता का स्मरण करती है, उसकी हर मनोकामना पूर्ण होती है।”
महिला ने उसी दिन से शुक्रवार का व्रत आरंभ किया। वह प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनती, माता की पूजा करती, गुड़-चना का भोग लगाती और सच्चे मन से कथा सुनती। व्रत के दिन वह न खट्टा खाती थी, न किसी को देती थी।
कुछ समय बाद उसकी परीक्षा आरंभ हुई। गरीबी और बढ़ गई, परिवार के लोग उसका उपहास करने लगे, परंतु उसने धैर्य और संतोष नहीं छोड़ा। उसने माता पर पूर्ण विश्वास रखा।
माता उसकी श्रद्धा से प्रसन्न हुईं। एक रात उसे स्वप्न में दर्शन देकर कहा—
“बेटी, तूने संतोष और श्रद्धा नहीं छोड़ी, अब तेरा दुःख दूर होगा।”
कुछ ही दिनों में उसके जीवन में चमत्कार हुआ। उसके घर में धन-धान्य आया, पति को अच्छा कार्य मिला और घर में सुख-शांति स्थापित हो गई। अंत में उसने विधि-विधान से व्रत का उद्यापन किया और माता का आभार प्रकट किया।
- संतोषी माता संतोष और श्रद्धा से शीघ्र प्रसन्न होती हैं।
- व्रत में नियमों का पालन अत्यंत आवश्यक है।
- सच्ची भक्ति से हर कष्ट दूर होता है।
🙏 जो भी श्रद्धा से शुक्रवार को संतोषी माता का व्रत करता है, माता उसकी मनोकामना अवश्य पूर्ण करती हैं।
शुक्रवार विशेष: संतोषी माता व्रत कथा
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