सूर्य देव को अर्घ्य देने की संपूर्ण विधि
📅 अर्घ्य देने का समय
- प्रतिदिन प्रातःकाल, विशेषकर रविवार
- सूर्योदय के समय अर्घ्य देना सर्वोत्तम माना जाता है
🚿 अर्घ्य की तैयारी
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें।
- लाल या केसरिया वस्त्र धारण करें।
- तांबे का लोटा/कलश लें।
🪔 अर्घ्य की सामग्री
- स्वच्छ जल
- तांबे का पात्र
- लाल फूल
- रोली, अक्षत
- (इच्छानुसार) चंदन या लाल चंदन
🙏 अर्घ्य देने की विधि
- तांबे के लोटे में जल भरें।
- उसमें लाल फूल, रोली और अक्षत डालें।
- पूर्व दिशा की ओर मुख करके खड़े हों।
- जल को धीरे-धीरे सूर्य की ओर अर्पित करें।
- अर्घ्य देते समय मंत्र जप करें:
ॐ घृणि सूर्याय नमः
या
ॐ आदित्याय नमः (3 या 11 बार)
🤲 अर्घ्य के बाद
- सूर्य देव को नमन करें।
- थोड़ी देर सूर्य नमस्कार करें।
- मन में स्वास्थ्य, तेज और सकारात्मक ऊर्जा की कामना करें।
🚫 विशेष नियम
- अर्घ्य देते समय जूते-चप्पल न पहनें।
- क्रोध और अशुद्ध विचारों से बचें।
- जल में दूध या शहद केवल विशेष अवसर पर ही मिलाएँ।
🌟 अर्घ्य देने के लाभ
- स्वास्थ्य और रोगों से मुक्ति
- आत्मविश्वास, तेज और मान-सम्मान में वृद्धि
- सूर्य दोष एवं पितृ दोष में शांति
- जीवन में ऊर्जा और सफलता
🙏 नियमित रूप से श्रद्धा से दिया गया सूर्य अर्घ्य जीवन को प्रकाशमय बना देता है।
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