संतोषी माता का व्रत कैसे करें? पूरी विधि
संतोषी माता का व्रत मुख्य रूप से शुक्रवार के दिन किया जाता है। माना जाता है कि सच्चे मन से यह व्रत करने पर माता प्रसन्न होकर भक्त की मनोकामनाएँ पूरी करती हैं और घर में सुख-शांति आती है। यह व्रत सामान्यतः लगातार 16 शुक्रवार तक किया जाता है।
1. व्रत शुरू करने का सही समय
- किसी भी शुक्रवार से व्रत शुरू किया जा सकता है।
- सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें।
- घर के मंदिर या साफ स्थान पर माता की तस्वीर या मूर्ति रखें।
2. पूजा की आवश्यक सामग्री
- संतोषी माता की फोटो या मूर्ति
- लाल कपड़ा
- घी का दीपक
- धूप या अगरबत्ती
- गुड़ और चना (सबसे महत्वपूर्ण प्रसाद)
- फूल
- जल से भरा कलश
- नारियल (वैकल्पिक)
3. व्रत करने की विधि (स्टेप-बाय-स्टेप)
1️⃣ सुबह की तैयारी
- सूर्योदय से पहले या बाद में स्नान करें।
- पूजा स्थान को साफ करें और लाल कपड़ा बिछाएँ।
- उस पर माता की तस्वीर रखें।
2️⃣ दीपक और पूजा
- घी का दीपक जलाएँ।
- धूप-अगरबत्ती जलाकर माता को फूल अर्पित करें।
- माता को गुड़ और चना का भोग लगाएँ।
3️⃣ व्रत कथा सुनना या पढ़ना
- शुक्रवार को संतोषी माता की व्रत कथा जरूर पढ़ें या सुनें।
- कथा के बाद माता की आरती करें।
4️⃣ दिनभर का व्रत
- व्रत रखने वाला व्यक्ति दिन में एक समय भोजन कर सकता है।
- कई लोग केवल फल या हल्का भोजन करते हैं।
4. व्रत के विशेष नियम
- व्रत के दिन खट्टा भोजन नहीं खाना चाहिए।
- किसी को भी खट्टा भोजन नहीं खिलाना चाहिए।
- मन में क्रोध, झूठ और बुरे विचार नहीं रखने चाहिए।
- माता से सच्चे मन से प्रार्थना करनी चाहिए।
5. 16वें शुक्रवार का उद्यापन
जब 16 शुक्रवार पूरे हो जाएँ तो उद्यापन करना चाहिए।
उद्यापन में:
- 8 बच्चों को भोजन कराना शुभ माना जाता है।
- उन्हें खट्टा भोजन नहीं देना चाहिए।
- गुड़-चना और मिठाई का प्रसाद बाँटना चाहिए।
6. संतोषी माता व्रत के लाभ
- मनोकामनाएँ पूरी होती हैं
- घर में सुख-शांति आती है
- आर्थिक समस्याएँ कम होती हैं
- पारिवारिक कलह दूर होती है
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