संकट मोचन हनुमान जी की पूजा का सही तरीका
संकट मोचन” हनुमान जी का वह रूप है जो भक्तों के कष्ट, भय, शत्रु-बाधा और नकारात्मकता को दूर करता है। श्रद्धा, नियम और शुद्ध आचरण के साथ की गई पूजा शीघ्र फलदायी मानी जाती है। नीचे घर या मंदिर में करने योग्य संपूर्ण, चरणबद्ध विधि दी गई है।
1️⃣ पूजा से पूर्व की तैयारी
🔹 शारीरिक व मानसिक शुद्धि
- ब्रह्म मुहूर्त/प्रातः स्नान करें।
- स्वच्छ लाल/केसरिया वस्त्र पहनें।
- पूजा स्थान को गंगाजल से शुद्ध करें।
- पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके आसन ग्रहण करें।
🔹 संकल्प
दाहिने हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लेकर संकल्प करें:
“मैं (अपना नाम) संकटों की शांति और कल्याण के लिए संकट मोचन हनुमान जी की पूजा कर रहा/रही हूँ। कृपा कर मेरे सभी कष्ट दूर करें।”
जल को भूमि/तांबे के पात्र में छोड़ दें।
2️⃣ आवश्यक पूजन सामग्री
- हनुमान जी की प्रतिमा/चित्र (संकट मोचन रूप)
- लाल फूल व लाल वस्त्र
- सिंदूर और चमेली का तेल
- रोली, अक्षत
- धूप, घी का दीपक
- गुड़-चना/बूंदी लड्डू
- पान का पत्ता, तुलसी (वैकल्पिक)
- नारियल (इच्छानुसार)
3️⃣ पूजा की क्रमबद्ध विधि
🔸 (1) दीप व धूप प्रज्वलन
सबसे पहले घी का दीपक जलाएं और धूप अर्पित करें।
🔸 (2) आवाहन व ध्यान
आंखें बंद कर हनुमान जी का ध्यान करें और मंत्र जपें:
ॐ श्री हनुमते नमः।
कम से कम 11/21/108 बार जप करें।
🔸 (3) सिंदूर अर्पण
चमेली के तेल में सिंदूर मिलाकर अर्पित करें।
(मान्यता है कि सिंदूर से विशेष कृपा प्राप्त होती है।)
🔸 (4) पुष्प, रोली, अक्षत अर्पित करें
लाल फूल चढ़ाएं, रोली-अक्षत अर्पित करें और नमस्कार करें।
🔸 (5) पाठ व स्तुति
- श्रद्धा से हनुमान चालीसा का पाठ करें।
- गंभीर संकट में बजरंग बाण का पाठ करें।
- विशेष शांति हेतु रामचरितमानस के सुंदरकांड का पाठ अत्यंत प्रभावी माना जाता है।
🔸 (6) आरती
“आरती कीजै हनुमान लला की” गाकर आरती करें और घंटी बजाएं।
🔸 (7) प्रसाद अर्पण
गुड़-चना या बूंदी का प्रसाद चढ़ाएं। बाद में परिवार में वितरित करें।
4️⃣ विशेष संकट निवारण उपाय
✔ भय/नकारात्मकता: 11 दिन लगातार हनुमान चालीसा पढ़ें।
✔ शत्रु बाधा: मंगलवार को 21 बार “ॐ हनुमते नमः” जप करें।
✔ आर्थिक संकट: बंदरों को गुड़-चना खिलाएं।
✔ रोग शांति: सुंदरकांड का नियमित पाठ करें।
5️⃣ व्रत के नियम (यदि व्रत रखें)
- एक समय फलाहार या नमक रहित भोजन।
- मांस, मदिरा व तामसिक भोजन त्यागें।
- ब्रह्मचर्य और सात्विक व्यवहार रखें।
- झूठ, क्रोध, अपशब्द से दूर रहें।
6️⃣ पूजा का श्रेष्ठ समय
- प्रातः सूर्योदय के बाद
- या सूर्यास्त के समय
- मंगलवार और शनिवार विशेष फलदायी माने जाते हैं।
7️⃣ सावधानियां
- पूजा दिखावे के लिए न करें।
- मन शुद्ध और शांत रखें।
- स्वास्थ्य समस्या हो तो कठोर उपवास न करें।
- किसी को कष्ट पहुंचाकर पूजा करने से फल नहीं मिलता।
🌺 निष्कर्ष
संकट मोचन हनुमान जी की पूजा का मूल आधार श्रद्धा, अनुशासन और विश्वास है। नियमित भक्ति से मानसिक बल, आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है। सच्चे मन से की गई आराधना जीवन के बड़े से बड़े संकट को भी दूर करने की शक्ति देती है।
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