शिवलिंग पर हल्दी न चढ़ाएँ
हिंदू धर्म में प्रत्येक देवता की पूजा-विधि अलग-अलग बताई गई है। जिस प्रकार विष्णु और देवी को हल्दी प्रिय है, उसी प्रकार भगवान शिव को हल्दी अर्पित करना शास्त्रसम्मत नहीं माना जाता।
🔱 शिवलिंग वैराग्य और संन्यास का प्रतीक
शिवलिंग वैराग्य, त्याग और संन्यास का प्रतीक है, जबकि हल्दी श्रृंगार, सौभाग्य और गृहस्थ जीवन का संकेत मानी जाती है। इसी कारण शिवलिंग पर हल्दी चढ़ाने की परंपरा नहीं है।
🕉 शास्त्रीय मान्यता
धार्मिक ग्रंथों और पुराणों के अनुसार, शिवजी को चंदन, भस्म, बेलपत्र, धतूरा, भांग और जल प्रिय हैं। हल्दी का उल्लेख शिवपूजा की वस्तुओं में नहीं मिलता, इसलिए इसे अर्पित करने से पूजा पूर्ण नहीं मानी जाती।
🌿 देवी-पूजा से संबंध
हल्दी विशेष रूप से देवी पार्वती और अन्य देवी-देवताओं की पूजा में उपयोग की जाती है। यदि शिव-पार्वती की संयुक्त पूजा हो, तो हल्दी माता पार्वती को अर्पित की जाती है, शिवलिंग पर नहीं।
⚠️ ऊर्जा संतुलन का कारण
मान्यता है कि हल्दी की तासीर उष्ण होती है, जबकि शिवलिंग पर चढ़ाया जाने वाला जल, दूध और बेलपत्र शीतल होते हैं। हल्दी चढ़ाने से यह ऊर्जा संतुलन भंग माना जाता है।
🌙 महाशिवरात्रि पर विशेष सावधानी
महाशिवरात्रि पर शिवपूजन का फल कई गुना होता है, इसलिए इस दिन पूजा-विधि का विशेष ध्यान रखा जाता है। अज्ञानवश हल्दी चढ़ाने से पुण्य में कमी मानी जाती है।
🪔 क्या करें, क्या न करें
✔️ करें: जल, दूध, दही, शहद, गंगाजल, बेलपत्र, चंदन, भस्म
❌ न करें: हल्दी, कुमकुम, केतकी फूल, तुलसी पत्र
✨ निष्कर्ष
शिव भोलानाथ हैं, वे भाव के भूखे हैं—लेकिन शास्त्रसम्मत विधि से की गई पूजा अधिक फलदायी होती है। इसलिए शिवलिंग पर हल्दी न चढ़ाकर, उन्हें प्रिय वस्तुएँ अर्पित करें और उनकी कृपा प्राप्त करें।
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