विश्वकर्मा पूजा 2025: व्रत और पूजा विधि की सम्पूर्ण जानकारी
विश्वकर्मा पूजा 2025: व्रत और पूजा विधि की सम्पूर्ण जानकारी
परिचय
विश्वकर्मा पूजा भगवान विश्वकर्मा जी को समर्पित है, जिन्हें देवताओं का शिल्पकार और ब्रह्मांड के प्रथम वास्तुकार माना जाता है। इस दिन विशेष रूप से कारखानों, उद्योगों, कार्यालयों और घरों में औजारों व मशीनों की पूजा की जाती है। यह दिन मेहनतकश लोगों और तकनीकी पेशों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है।
📅 विश्वकर्मा पूजा 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्त
- तिथि: 17 सितंबर 2025 (बुधवार)
- पूजा का शुभ समय: प्रातः 07:30 से दोपहर 12:15 तक (स्थानीय पंचांग अनुसार अंतर हो सकता है)
🙏 व्रत विधि और पूजा की प्रक्रिया
- प्रातः स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- भगवान विश्वकर्मा की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
- पूजा सामग्री तैयार करें – फूल, चावल, सुपारी, धूप, दीपक, फल, मिठाई, नारियल, अक्षत, कलश और औजार।
- औजारों, मशीनों और वाहनों को धोकर स्वच्छ करें।
- कलश स्थापना कर भगवान विश्वकर्मा जी का ध्यान करें।
- भगवान विश्वकर्मा को पुष्प, अक्षत और भोग अर्पित करें।
- विश्वकर्मा मंत्र का जाप करें –
“ॐ आधार शक्तपे नमः, ॐ कूमयि नमः, ॐ अनन्तम नमः, पृथिव्यै नमः।” - प्रसाद वितरण करें और परिवार व कार्यस्थल में सभी के साथ साझा करें।
विश्वकर्मा पूजा का महत्व
- औद्योगिक क्षेत्र में उन्नति और सफलता की प्राप्ति।
- कार्यस्थल पर दुर्घटनाओं से बचाव।
- परिवार और व्यवसाय में सुख-समृद्धि।
- जीवन में तकनीकी ज्ञान और रचनात्मकता का विकास।
विशेष काम जो करें
- इस दिन औजारों और मशीनों को आराम दिया जाता है।
- कारखाने और कार्यस्थल पर पूजा कर भोग लगाया जाता है।
- व्रतधारी को दिनभर सात्विक भोजन करना चाहिए।
👉 निष्कर्ष:
विश्वकर्मा पूजा 2025 का व्रत और पूजा विधि कर्मशीलता, मेहनत और कौशल की साधना है। भगवान विश्वकर्मा की कृपा से कार्यक्षेत्र में प्रगति और जीवन में समृद्धि मिलती है।
विश्वकर्मा पूजा 2025
1. लाभ
- कार्यस्थल और उद्योगों में प्रगति होती है।
- मशीनरी और औजारों में खराबी कम होती है।
- व्यवसाय में सफलता और आर्थिक उन्नति मिलती है।
- घर और कार्यस्थल पर शांति और सकारात्मक ऊर्जा आती है।
- दुर्घटनाओं और अनहोनी से रक्षा होती है।
2. महत्व
- भगवान विश्वकर्मा को सृष्टि का प्रथम शिल्पकार और वास्तु देवता माना जाता है।
- इस दिन तकनीकी ज्ञान और कला की साधना की जाती है।
- कारीगर, मजदूर, इंजीनियर और व्यवसायी अपने औजारों व मशीनों की पूजा करते हैं।
- मेहनत और कौशल की शक्ति का सम्मान करने का पर्व है।
3. शिक्षा
- मेहनत और कौशल से ही सफलता मिलती है।
- औजारों और साधनों का सम्मान करना चाहिए।
- कार्यस्थल की स्वच्छता और सुरक्षा जरूरी है।
- सभी को अपने कर्म पर गर्व होना चाहिए।
- सामूहिक पूजा से आपसी सहयोग और भाईचारा बढ़ता है।
4. पूजा सामग्री
- भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा या चित्र
- कलश और जल
- फूल, अक्षत (चावल), रोली, मौली
- धूप, दीपक, कपूर
- नारियल, सुपारी, पान
- फल, मिठाई, पंचामृत
- औजार और मशीनें (स्वच्छ करके)
- पीली वस्त्र, पूजा थाली
5. पूजा करने के उपाय
- प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- भगवान विश्वकर्मा की मूर्ति या चित्र की स्थापना करें।
- कलश स्थापना कर गंगाजल से शुद्धिकरण करें।
- औजारों और मशीनों को धोकर पूजा स्थान पर रखें।
- धूप-दीप जलाकर भगवान विश्वकर्मा का ध्यान करें।
- मंत्रों का जाप करें –
“ॐ आधार शक्तपे नमः, ॐ कूमयि नमः, ॐ अनन्तम नमः, पृथिव्यै नमः।” - प्रसाद अर्पित कर सबमें बांटें।
6. विशेष काम
- इस दिन औजारों और मशीनों को आराम दिया जाता है यानी काम बंद रखा जाता है।
- कारखानों, उद्योगों और कार्यस्थलों पर विशेष पूजा होती है।
- मजदूर और कर्मचारी अपने-अपने साधनों की पूजा करते हैं।
- वाहन चालकों के लिए गाड़ी की पूजा और नारियल फोड़ना शुभ माना जाता है।
- सामूहिक भंडारा या प्रसाद वितरण किया जाता है।
👉 इस तरह विश्वकर्मा पूजा 2025 केवल धार्मिक पर्व ही नहीं बल्कि कर्म, कौशल और मेहनतकश लोगों का उत्सव है।
हनुमान जी की पूजा से जीवन में शांति और सुख
