विजय एकादशी पर क्या करें और क्या न करें
✅ क्या करें (Do’s)
- प्रातः स्नान करें – सूर्योदय से पहले उठकर स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- भगवान विष्णु की पूजा करें – पीले वस्त्र, फूल, तुलसी दल, धूप-दीप अर्पित करें।
- व्रत का संकल्प लें – श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत रखने का संकल्प करें।
- विष्णु सहस्रनाम या गीता पाठ करें – मंत्र जाप और भजन-कीर्तन करें।
- फलाहार करें (यदि आवश्यक हो) – फल, दूध, मखाना, साबूदाना, सिंघाड़े का आटा आदि ग्रहण कर सकते हैं।
- सात्विकता बनाए रखें – मन, वचन और कर्म से पवित्र रहें।
- दान-पुण्य करें – गरीबों को अन्न, वस्त्र या दक्षिणा दें।
- तुलसी पूजन करें – भगवान विष्णु को तुलसी अर्पित करना शुभ माना जाता है।
- रात्रि जागरण करें (यदि संभव हो) – भजन-कीर्तन और भगवान का स्मरण करें।
- द्वादशी तिथि में पारण करें – अगले दिन नियमपूर्वक व्रत खोलें।
❌ क्या न करें (Don’ts)
- चावल का सेवन न करें – एकादशी पर चावल वर्जित माना गया है।
- मांस, मदिरा और तामसिक भोजन न करें।
- लहसुन-प्याज का सेवन न करें।
- क्रोध, झूठ और निंदा से दूर रहें।
- अत्यधिक सोना या आलस्य न करें।
- विवाद और अपशब्दों से बचें।
- व्रत का मजाक या अनादर न करें।
- बिना नियम के पारण न करें – द्वादशी तिथि का ध्यान रखें।
विजय एकादशी का व्रत विजय और सफलता का प्रतीक माना जाता है। श्रद्धा और नियमपूर्वक किया गया यह व्रत जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और सफलता प्रदान करता है।
यदि आप चाहें तो मैं इसकी पूजा विधि या कथा भी बता सकता हूँ।
✅ क्या करें (Do’s)
- प्रातः स्नान करें – सूर्योदय से पहले उठकर स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- भगवान विष्णु की पूजा करें – पीले वस्त्र, फूल, तुलसी दल, धूप-दीप अर्पित करें।
- व्रत का संकल्प लें – श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत रखने का संकल्प करें।
- विष्णु सहस्रनाम या गीता पाठ करें – मंत्र जाप और भजन-कीर्तन करें।
- फलाहार करें (यदि आवश्यक हो) – फल, दूध, मखाना, साबूदाना, सिंघाड़े का आटा आदि ग्रहण कर सकते हैं।
- सात्विकता बनाए रखें – मन, वचन और कर्म से पवित्र रहें।
- दान-पुण्य करें – गरीबों को अन्न, वस्त्र या दक्षिणा दें।
- तुलसी पूजन करें – भगवान विष्णु को तुलसी अर्पित करना शुभ माना जाता है।
- रात्रि जागरण करें (यदि संभव हो) – भजन-कीर्तन और भगवान का स्मरण करें।
- द्वादशी तिथि में पारण करें – अगले दिन नियमपूर्वक व्रत खोलें।
❌ क्या न करें (Don’ts)
- चावल का सेवन न करें – एकादशी पर चावल वर्जित माना गया है।
- मांस, मदिरा और तामसिक भोजन न करें।
- लहसुन-प्याज का सेवन न करें।
- क्रोध, झूठ और निंदा से दूर रहें।
- अत्यधिक सोना या आलस्य न करें।
- विवाद और अपशब्दों से बचें।
- व्रत का मजाक या अनादर न करें।
- बिना नियम के पारण न करें – द्वादशी तिथि का ध्यान रखें।
विजय एकादशी का व्रत विजय और सफलता का प्रतीक माना जाता है। श्रद्धा और नियमपूर्वक किया गया यह व्रत जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और सफलता प्रदान करता है।
बृहस्पति व्रत कितने समय तक करना चाहिए
