पौष दशमी व्रत: श्रद्धा और संकल्प का पर्व
रुद्राभिषेक भगवान शिव को प्रसन्न करने की अत्यंत प्रभावशाली वैदिक पूजा है। इसमें रुद्राष्टाध्यायी (यजुर्वेद) के मंत्रों से शिवलिंग का अभिषेक किया जाता है।
1. रुद्राभिषेक का महत्व
रुद्राभिषेक करने से
- ग्रह दोष शांति
- रोग, कष्ट और भय से मुक्ति
- धन, स्वास्थ्य और यश की प्राप्ति
- मनोकामनाओं की पूर्ति
मानी जाती है।
2. रुद्राभिषेक का शुभ समय
- सोमवार
- सावन माह
- महाशिवरात्रि
- प्रदोष काल
विशेष फलदायी माने गए हैं।
3. आवश्यक सामग्री
- शिवलिंग
- गंगाजल / शुद्ध जल
- दूध, दही, घी, शहद, शक्कर (पंचामृत)
- बेलपत्र, धतूरा, भस्म
- सफेद फूल
- धूप, दीप, नैवेद्य
- रुद्राक्ष माला
4. पूजा की तैयारी
- स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- पूजा स्थान को शुद्ध करें।
- उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठें।
- संकल्प लें कि अमुक कारण से रुद्राभिषेक कर रहे हैं।
5. रुद्राभिषेक की विधि
- शिवलिंग का शुद्धिकरण
- सबसे पहले शुद्ध जल से शिवलिंग को स्नान कराएँ।
- पंचामृत अभिषेक
- क्रम से दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से अभिषेक करें।
- पुनः जलाभिषेक
- पंचामृत के बाद फिर से जल अर्पित करें।
- मंत्र जप
- रुद्राष्टाध्यायी के मंत्रों का पाठ करें।
- यदि संभव न हो तो “ॐ नमः शिवाय” का जप करें।
- बेलपत्र अर्पण
- प्रत्येक बेलपत्र के साथ “ॐ नमः शिवाय” कहें।
6. पूजन और आरती
- भस्म, फूल, धूप, दीप अर्पित करें।
- शिव जी की आरती करें।
- अंत में क्षमा प्रार्थना और मनोकामना निवेदन करें।
7. आवश्यक सावधानियाँ
- तुलसी, हल्दी और केतकी पुष्प न चढ़ाएँ।
- बेलपत्र खंडित न हो।
- पूजा में पूर्ण श्रद्धा और शांति रखें।
8. रुद्राभिषेक का फल
शास्त्रों के अनुसार रुद्राभिषेक से
- जीवन के कष्ट नष्ट होते हैं
- नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है
- शिव कृपा से सुख-समृद्धि बढ़ती है
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