बृहस्पति व्रत की कथा पढ़ने की विधि
- गुरुवार के दिन प्रातः स्नान कर स्वच्छ पीले वस्त्र धारण करें।
- पूजा स्थान को साफ करके पीले कपड़े पर बृहस्पति देव की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
- हल्दी, चंदन, पीले फूल, अक्षत, पीली मिठाई या चने की दाल अर्पित करें।
- दीपक और धूप जलाकर बृहस्पति देव का ध्यान करें।
- व्रत का संकल्प लें कि मैं श्रद्धा से बृहस्पति व्रत और कथा पाठ कर रहा/रही हूँ।
- इसके बाद “ॐ बृहस्पतये नमः” मंत्र का 108 बार जप करें।
- अब शांति से बैठकर बृहस्पति व्रत की कथा पढ़ें या सुनें।
- कथा पढ़ते समय बीच में न उठें, मन को एकाग्र रखें।
- कथा पूर्ण होने पर बृहस्पति देव की आरती करें।
- अंत में सभी से हुई भूल-चूक के लिए क्षमा प्रार्थना करें।
विशेष नियम
- कथा हमेशा गुरुवार को ही पढ़ें।
- कथा पढ़ते समय पीले रंग का विशेष महत्व होता है।
- संभव हो तो कथा के बाद पीले वस्त्र, चने की दाल, हल्दी या केला दान करें।
- व्रत में नमक रहित भोजन करना शुभ माना जाता है।
- देवगुरु बृहस्पति की विशेष कृपा प्राप्त होती है
- कुंडली में गुरु ग्रह मजबूत होता है
- गुरु दोष के अशुभ प्रभाव कम होते हैं
- जीवन में धन, समृद्धि और सुख बढ़ता है
- विवाह में आ रही बाधाएँ दूर होती हैं
- संतान सुख की प्राप्ति होती है
- शिक्षा, ज्ञान और बुद्धि का विकास होता है
- भाग्य का सहयोग मिलने लगता है
- नौकरी और व्यापार में उन्नति होती है
- मानसिक तनाव और भ्रम दूर होते हैं
- घर में सुख-शांति और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है
- समाज में मान-सम्मान बढ़ता है
- धर्म, सत्य और सदाचार की भावना बढ़ती है
- आर्थिक परेशानियों से राहत मिलती है
- जीवन में स्थिरता और आत्मविश्वास आता है
हनुमान व्रत से जीवन में सुख-शांति
