बृहस्पति देव के व्रत की सही पूजा विधि
गुरुवार का व्रत देवताओं के गुरु बृहस्पति देव को समर्पित होता है। इन्हें ज्ञान, धर्म, संतान, विवाह और धन-संपत्ति का कारक माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र में ये बृहस्पति ग्रह के अधिपति हैं। जिनकी कुंडली में गुरु कमजोर हो, विवाह में बाधा हो या आर्थिक समस्या हो—उन्हें यह व्रत विशेष फलदायक माना जाता है।
नीचे बृहस्पति देव के व्रत की संपूर्ण और शास्त्रसम्मत पूजा विधि दी जा रही है।
1. व्रत का संकल्प (शुरुआत कैसे करें)
- व्रत की शुरुआत शुक्ल पक्ष के गुरुवार से करना शुभ माना जाता है।
- 16 या 21 गुरुवार तक व्रत रखा जाता है।
- प्रातः स्नान कर स्वच्छ पीले वस्त्र धारण करें।
- पूजा स्थान को गंगाजल से शुद्ध करें।
- हाथ में जल, अक्षत और फूल लेकर संकल्प लें:
संकल्प मंत्र (सरल रूप में):
“मैं (अपना नाम) श्रद्धा भाव से बृहस्पति देव की कृपा प्राप्ति हेतु गुरुवार व्रत का संकल्प करता/करती हूँ।”
2. पूजा की आवश्यक सामग्री
- बृहस्पति देव की तस्वीर या मूर्ति
- पीला वस्त्र
- हल्दी की गांठ या पाउडर
- चने की दाल
- गुड़
- पीले फूल
- केला
- घी का दीपक
- धूपबत्ती
- बेसन के लड्डू या पीली मिठाई
- जल से भरा कलश
3. पूजा की विधि (स्टेप बाय स्टेप)
स्थापना
- पूजा स्थान पर पीला वस्त्र बिछाकर बृहस्पति देव की तस्वीर स्थापित करें।
- कलश में जल भरकर उसके ऊपर नारियल रखें।
आह्वान
- हाथ जोड़कर भगवान का ध्यान करें।
- हल्दी से तिलक करें।
- पीले फूल अर्पित करें।
अर्पण
- चने की दाल और गुड़ चढ़ाएं।
- केला और पीली मिठाई अर्पित करें।
- घी का दीपक जलाएं।
मंत्र जप
मुख्य मंत्र:
“ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः”
- इस मंत्र की 108 बार माला जप करें।
या
“देवानां च ऋषीणां च गुरुं काञ्चन सन्निभम्।
बुद्धिभूतं त्रिलोकेशं तं नमामि बृहस्पतिम्॥”
व्रत कथा पाठ
- बृहस्पति व्रत कथा अवश्य पढ़ें या सुनें।
- कथा के बिना व्रत अधूरा माना जाता है।
आरती
- दीपक से आरती करें।
- परिवार के सभी सदस्य आरती में शामिल हों।
- प्रसाद वितरण करें।
4. केले के पेड़ की पूजा
गुरुवार को केले के पेड़ में बृहस्पति देव का वास माना जाता है।
- पेड़ की जड़ में जल अर्पित करें।
- हल्दी और चने की दाल चढ़ाएं।
- दीपक जलाएं।
- 7 परिक्रमा करें और मनोकामना मांगें।
5. भोजन नियम
✔️ दिन में एक समय भोजन करें।
✔️ पीली वस्तुएं खाएं (चना दाल, खिचड़ी, बेसन, केला)।
✔️ नमक का त्याग करें (कुछ लोग सेंधा नमक लेते हैं)।
✔️ मांस, शराब, अंडा निषिद्ध।
6. गुरुवार को क्या न करें?
- बाल, दाढ़ी, नाखून न कटवाएं।
- कपड़े न धोएं।
- घर में पोंछा न लगाएं।
- केले का पेड़ न काटें।
- गुरुजनों या बुजुर्गों का अपमान न करें।
7. उद्यापन विधि (समापन)
- 16वें या 21वें गुरुवार को विशेष पूजा करें।
- पीले वस्त्र, चना दाल, हल्दी दान करें।
- ब्राह्मण या जरूरतमंद को भोजन कराएं।
- बच्चों को पीला प्रसाद बांटें।
8. व्रत के लाभ
- विवाह में आ रही बाधाएं दूर होती हैं।
- संतान सुख की प्राप्ति होती है।
- आर्थिक स्थिति मजबूत होती है।
- शिक्षा और करियर में उन्नति होती है।
- घर में सुख-शांति बनी रहती है।
विशेष सावधानियां
- व्रत श्रद्धा और नियमपूर्वक करें।
- झूठ, क्रोध और अपशब्द से बचें।
- पीले रंग का अधिक प्रयोग करें।
- गुरु, शिक्षक और माता-पिता का सम्मान करें।
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