बृहस्पतिवार का व्रत देवताओं के गुरु बृहस्पति देव को समर्पित होता है। इन्हें ज्ञान, धर्म, संतान, विवाह और धन-संपत्ति का कारक माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र में ये बृहस्पति ग्रह के स्वामी हैं। जिनकी कुंडली में गुरु कमजोर हो, विवाह में विलंब हो या आर्थिक कठिनाई हो—उन्हें यह व्रत विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है।
नीचे विस्तार से जानिए कि व्रत कब और कैसे शुरू करना चाहिए।
1. बृहस्पतिवार व्रत कब शुरू करें?
(1) शुभ दिन का चयन
- किसी भी शुक्ल पक्ष के पहले गुरुवार से व्रत शुरू करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
- विशेष शुभ माह: माघ, फाल्गुन, वैशाख, श्रावण या कार्तिक मास।
- गुरु पुष्य योग या गुरु पूर्णिमा के आसपास शुरू करना और भी शुभ माना जाता है।
(2) कितने गुरुवार रखें?
- सामान्यतः 16 गुरुवार का व्रत रखा जाता है।
- कुछ लोग 21 गुरुवार भी रखते हैं।
- मनोकामना पूर्ण होने तक भी व्रत जारी रखा जा सकता है।
(3) किन लोगों को शुरू करना चाहिए?
- जिनका विवाह नहीं हो रहा हो।
- संतान प्राप्ति में बाधा हो।
- आर्थिक समस्या चल रही हो।
- विद्यार्थी और शिक्षक वर्ग।
- जिनकी कुंडली में गुरु कमजोर हो।
2. बृहस्पतिवार व्रत कैसे शुरू करें? (पूरी विधि)
(1) प्रातःकालीन तैयारी
- ब्रह्म मुहूर्त में उठें।
- स्नान करके स्वच्छ पीले वस्त्र पहनें।
- पूजा स्थान को गंगाजल से शुद्ध करें।
- मन में श्रद्धा और शांति रखें।
(2) संकल्प विधि
एक तांबे के लोटे में जल लें, उसमें हल्दी और अक्षत डालें।
दाहिने हाथ में जल लेकर संकल्प करें:
“मैं (अपना नाम), बृहस्पति देव की कृपा प्राप्ति हेतु आज से 16 गुरुवार व्रत का संकल्प करता/करती हूँ।”
जल को पूजा स्थान में छोड़ दें।
(3) पूजा की प्रक्रिया
आवश्यक सामग्री:
- बृहस्पति देव की तस्वीर
- पीला वस्त्र
- हल्दी
- चने की दाल
- गुड़
- केला
- पीले फूल
- घी का दीपक
पूजा कैसे करें:
- पीला कपड़ा बिछाकर भगवान की तस्वीर स्थापित करें।
- हल्दी से तिलक करें।
- पीले फूल, चना दाल और गुड़ अर्पित करें।
- घी का दीपक जलाएं।
- मंत्र जप करें:
“ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः” (108 बार)
- बृहस्पति व्रत कथा पढ़ें या सुनें।
- आरती करें और प्रसाद बांटें।
3. केले के पेड़ की पूजा (विशेष महत्व)
गुरुवार को केले के वृक्ष में बृहस्पति देव का वास माना जाता है।
- जड़ में जल अर्पित करें।
- हल्दी और चने की दाल चढ़ाएं।
- दीपक जलाएं।
- 7 परिक्रमा करें।
4. व्रत के दौरान भोजन नियम
✔️ दिन में एक समय भोजन करें।
✔️ पीली वस्तुएं खाएं (चना दाल, खिचड़ी, बेसन, केला)।
✔️ नमक न खाएं (कुछ लोग सेंधा नमक लेते हैं)।
✔️ मांस, शराब, अंडा वर्जित।
5. गुरुवार को क्या न करें?
- बाल, नाखून न कटवाएं।
- कपड़े न धोएं।
- घर में पोंछा न लगाएं।
- केले का पेड़ न काटें।
- गुरुजनों का अपमान न करें।
6. व्रत का उद्यापन कब और कैसे करें?
- 16वें या 21वें गुरुवार को विशेष पूजा करें।
- पीले वस्त्र, हल्दी, चना दाल का दान करें।
- ब्राह्मण या जरूरतमंद को भोजन कराएं।
- बच्चों को पीला प्रसाद बांटें।
7. व्रत शुरू करते समय ध्यान रखने योग्य बातें
- व्रत श्रद्धा और विश्वास से करें।
- बीच में व्रत न छोड़ें (अत्यंत आवश्यक स्थिति में अगले गुरुवार से पुनः शुरू करें)।
- झूठ, क्रोध, अपशब्द से दूर रहें।
- गुरु, माता-पिता और बुजुर्गों का सम्मान करें।
बृहस्पतिवार व्रत के लाभ
- विवाह में आ रही बाधाएं दूर होती हैं।
- संतान सुख मिलता है।
- आर्थिक उन्नति होती है।
- शिक्षा और करियर में सफलता मिलती है।
- घर में सुख-शांति बनी रहती है।
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