बृहस्पतिवार पर दीपक जलाने से पहले जान लें शुभ दिशा
- बृहस्पतिवार को दीपक जलाने की सबसे शुभ दिशा पूर्व मानी गई है।
- पूर्व दिशा सूर्य, ज्ञान और सकारात्मक ऊर्जा की दिशा है।
- इस दिशा में दीपक जलाने से बुद्धि, शिक्षा, करियर और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।
- दीपक जलाते समय आपका मुख भी पूर्व की ओर होना चाहिए।
ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) — देवताओं की दिशा
- यदि पूर्व दिशा में दीपक जलाना संभव न हो तो ईशान कोण श्रेष्ठ विकल्प है।
- यह दिशा देवताओं और गुरु तत्व की दिशा मानी जाती है।
- यहां दीपक जलाने से गुरु दोष, आर्थिक रुकावटें और मानसिक तनाव दूर होते हैं।
बृहस्पतिवार को कैसा दीपक जलाएं
- तेल/घी
- शुद्ध घी का दीपक सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।
- घी सात्विक और पवित्र होता है, जो गुरु ग्रह को प्रिय है।
- बाती
- रुई की बाती या पीले रंग की बाती शुभ फल देती है।
- दीपक का प्रकार
- मिट्टी, पीतल या पीले रंग का दीपक उत्तम है।
- टूटे या लोहे के दीपक का प्रयोग न करें।
दीपक जलाने की सरल विधि
- बृहस्पतिवार को स्नान कर स्वच्छ वस्त्र (विशेषकर पीले) पहनें।
- पूजा स्थान को साफ करें।
- दीपक में घी डालकर बाती लगाएं।
- दीपक को पूर्व या ईशान दिशा में रखें।
- भगवान विष्णु या देवगुरु बृहस्पति का स्मरण करें।
- मंत्र जप करें:
“ॐ बृं बृहस्पतये नमः” — 108 बार - दीपक को शांत मन से जलने दें।
सही दिशा में दीपक जलाने के लाभ
- गुरु ग्रह मजबूत होता है
- धन, शिक्षा और कार्य में उन्नति
- विवाह और संतान से जुड़े दोष दूर होते हैं
- घर में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है
- भाग्य और निर्णय क्षमता मजबूत होती है
ध्यान रखने योग्य सावधानियां
- दक्षिण दिशा में दीपक न जलाएं, यह अशुभ माना जाता है।
- दीपक को जमीन पर न रखें।
- क्रोध, अशांति या नकारात्मक भाव से दीपक न जलाएं।
- बुझा हुआ या टूटा दीपक दोबारा न जलाएं।
निष्कर्ष
बृहस्पतिवार पर दीपक जलाने से पहले यह अवश्य जान लें कि पूर्व दिशा सबसे शुभ है और ईशान कोण श्रेष्ठ विकल्प। सही दिशा, सही विधि और श्रद्धा के साथ जलाया गया दीपक देवगुरु बृहस्पति को प्रसन्न करता है और जीवन में सुख-समृद्धि लाता है।
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