पीले वस्त्र पहनकर केले के पेड़ की पूजा विधि
🌼 पूजा से पहले की तैयारी
1. शुद्धता और संकल्प
- प्रातः ब्रह्म मुहूर्त या सूर्योदय के बाद स्नान करें।
- साफ और शुद्ध पीले रंग के वस्त्र पहनें।
- पूजा से पहले मन में संकल्प लें—
“मैं (अपना नाम) श्रद्धा और भक्ति से गुरुवार का व्रत और केले के वृक्ष की पूजा कर रहा/रही हूँ। कृपया मेरी मनोकामना पूर्ण करें।”
🌼 आवश्यक पूजा सामग्री
- जल से भरा लोटा
- हल्दी
- चने की दाल
- गुड़
- पीले फूल
- रोली (कुमकुम)
- दीपक (घी का)
- धूप
- पीला धागा (मौली)
- केले का फल
🌼 पूजा की संपूर्ण विधि
1. केले के पेड़ के पास जाएँ
यदि घर में केला का पेड़ हो तो वहीं पूजा करें। यदि न हो तो मंदिर या किसी बगीचे में स्थित केले के वृक्ष के पास जाएँ।
2. जल अर्पण
- सबसे पहले पेड़ की जड़ में स्वच्छ जल अर्पित करें।
- जल अर्पित करते समय मंत्र बोलें—
“ॐ बृं बृहस्पतये नमः”
3. तिलक और अर्पण
- हल्दी और रोली से केले के तने पर तिलक लगाएँ।
- चने की दाल और पीले फूल अर्पित करें।
- गुड़ और केले का भोग लगाएँ।
4. दीप और धूप
- घी का दीपक जलाएँ।
- धूप दिखाएँ और भगवान से प्रार्थना करें।
5. मंत्र जाप
कम से कम 108 बार मंत्र का जप करें:
“ॐ बृं बृहस्पतये नमः”
या
“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय”
6. परिक्रमा
- केले के पेड़ की 7 या 11 परिक्रमा करें।
- परिक्रमा करते समय पीला धागा (मौली) पेड़ के चारों ओर बाँध सकते हैं।
- हर परिक्रमा में अपनी मनोकामना मन ही मन दोहराएँ।
🌼 पूजा का विशेष महत्व
✅ विवाह में देरी हो तो
अविवाहित लड़कियाँ नियमित 16 गुरुवार तक यह पूजा करें। शीघ्र विवाह के योग बनते हैं।
✅ आर्थिक उन्नति के लिए
लगातार 11 गुरुवार पूजा करने से धन संबंधी बाधाएँ कम होती हैं।
✅ संतान प्राप्ति के लिए
पति-पत्नी मिलकर श्रद्धा से पूजा करें।
✅ गुरु ग्रह को मजबूत करने हेतु
जिनकी कुंडली में गुरु कमजोर हो, उनके लिए यह उपाय अत्यंत प्रभावी माना जाता है।
🌼 पूजा के दिन क्या न करें
- इस दिन नमक का सेवन कम या वर्जित रखें (यदि व्रत कर रहे हों)।
- बाल या नाखून न काटें।
- केले के पेड़ को नुकसान न पहुँचाएँ।
- केले का पेड़ घर में हो तो उस दिन उसे काटें नहीं।
🌼 आध्यात्मिक लाभ
- मानसिक शांति
- आत्मविश्वास में वृद्धि
- पारिवारिक सुख
- सामाजिक सम्मान
- ज्ञान और विवेक में वृद्धि
🌺 निष्कर्ष
पीले वस्त्र पहनकर केले के पेड़ की पूजा करना केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि श्रद्धा और सकारात्मक ऊर्जा से जुड़ा एक आध्यात्मिक अभ्यास है। नियमित रूप से और सच्चे मन से की गई यह पूजा जीवन में स्थिरता, समृद्धि और सौभाग्य लाती है।
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