दीपावली पर गणेश जी और लक्ष्मी जी की पूजा विधि
दीपावली पर गणेश–लक्ष्मी पूजा विधि
1. पूजन का समय (मुहूर्त)
- दीपावली की रात अमावस्या तिथि को प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद लगभग 1.5 घंटे) में पूजा करना शुभ माना जाता है।
- यदि चाहें तो निशीथ काल (रात्रि 12 बजे के आसपास) भी पूजा कर सकते हैं।
2. तैयारी
- घर की सफाई अच्छे से करें।
- पूजा के लिए एक चौकी पर लाल या पीले वस्त्र बिछाएँ।
- उस पर गणेश जी और लक्ष्मी जी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
- पास में कलश रखें – उसमें जल, सुपारी, आम के पत्ते, और नारियल रखें।
3. पूजन सामग्री
- दीपक (तेल या घी का)
- फूल (विशेषकर कमल या लाल पुष्प)
- चावल, हल्दी, कुंकुम
- रोली, अक्षत, पान, सुपारी
- मिठाई, फल
- धूप, अगरबत्ती
- नये सिक्के या नोट (धन के प्रतीक के रूप में)
4. पूजन क्रम
(1) आचमन और संकल्प
- पहले अपने दाहिने हाथ में जल लेकर संकल्प करें —
“मैं अमुक (अपना नाम) दीपावली के पावन पर्व पर श्री गणेश एवं श्री लक्ष्मी जी की पूजा कर रहा/रही हूँ, कृपया मुझ पर कृपा करें।”
(2) गणेश जी की पूजा
- गणेश जी को स्नान, वस्त्र, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य अर्पित करें।
- मंत्र:
“ॐ गं गणपतये नमः” - गणेश जी से निवेदन करें कि पूजा में कोई त्रुटि न हो।
(3) माता लक्ष्मी जी की पूजा
- माता लक्ष्मी जी को स्नान कराएँ (प्रतिमा पर जल छिड़कें)।
- लाल फूल, अक्षत, रोली, कुंकुम, मिठाई अर्पित करें।
- मंत्र:
“ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः” - माता को कमल फूल, धूप, दीप अर्पण करें।
(4) धन-कुबेर पूजन
- धन स्थान या तिजोरी में भी दीपक जलाएँ।
- भगवान कुबेर का भी ध्यान करें।
- मंत्र:
“ॐ कुबेराय नमः”
(5) आरती
- पहले श्री गणेश जी की आरती करें —
“जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा…” - फिर माता लक्ष्मी जी की आरती करें —
“ॐ जय लक्ष्मी माता…” - घर के सभी दीपक जलाएँ और घर में प्रकाश फैलाएँ।
5. विशेष उपाय
- पूजा के बाद 1 रुपया या चांदी का सिक्का लाल कपड़े में लपेटकर तिजोरी में रखें — यह लक्ष्मी जी का आशीर्वाद माना जाता है।
- दीपक पूरे घर में जलाएँ, विशेषकर मुख्य द्वार पर — ताकि माँ लक्ष्मी का स्वागत हो।
6. निष्कर्ष
दीपावली की रात्रि में श्रद्धा, स्वच्छता और शुद्ध भावना से पूजा करने पर भगवान गणेश जी बुद्धि और सफलता देते हैं, और माता लक्ष्मी धन-संपत्ति व सौभाग्य का आशीर्वाद देती हैं।
. गणेश–लक्ष्मी पूजा का धार्मिक महत्व
- गणेश जी को “विघ्नहर्ता” कहा गया है, अर्थात् वे सभी बाधाओं का नाश करते हैं।
दीपावली की पूजा की शुरुआत गणेश जी के पूजन से करने का अर्थ है —
जीवन में आरंभ होने वाले नए कार्यों से पहले बुद्धि, विवेक और सफलता की कामना करना। - माता लक्ष्मी “धन, वैभव, और सौभाग्य की देवी” हैं।
दीपावली की रात लक्ष्मी आगमन की रात्रि कही जाती है — इस दिन माता पृथ्वी पर विचरण करती हैं और जो व्यक्ति स्वच्छता, श्रद्धा, और सच्चे मन से पूजा करता है, उस पर कृपा करती हैं। - इस दिन अमावस्या की अंधेरी रात में दीपक जलाना अज्ञान और दुख के अंधकार को दूर कर ज्ञान और सुख के प्रकाश का स्वागत करने का प्रतीक है।
2. आध्यात्मिक महत्व
- दीपावली केवल बाहरी दीप जलाने का पर्व नहीं है, बल्कि यह अंतरात्मा के दीप को प्रज्वलित करने का अवसर है।
जब हम गणेश जी और लक्ष्मी जी की पूजा करते हैं, तब हम अपने अंदर की नकारात्मकता, आलस्य, और असंतोष को दूर कर सकारात्मकता, मेहनत और संतोष की भावना को जगाते हैं। - गणेश जी “बुद्धि और संयम” के प्रतीक हैं, जबकि लक्ष्मी जी “धन और ऐश्वर्य” की प्रतीक हैं।
दोनों का संयुक्त पूजन यह संदेश देता है कि —
धन का उपयोग तभी सार्थक है जब वह विवेक और सदाचार के साथ हो।
3. आर्थिक और पारिवारिक लाभ
- दीपावली की रात्रि को लक्ष्मी जी की पूजा करने से घर में धन, वैभव और समृद्धि की वृद्धि होती है।
- जिन घरों में श्रद्धा और नियमपूर्वक हर वर्ष गणेश–लक्ष्मी पूजन होता है, वहाँ कभी दरिद्रता, कलह या अकाल का भय नहीं रहता।
- व्यापारियों के लिए यह दिन विशेष शुभ माना गया है। नए खाते (लेजर या बहीखाते) इसी दिन श्रीगणेश–लक्ष्मी पूजन के साथ प्रारंभ किए जाते हैं, ताकि वर्षभर लाभ और वृद्धि बनी रहे।
- यह पूजा परिवार में सद्भाव, प्रेम और एकता को बढ़ाती है।
4. मानसिक और सामाजिक महत्व
- दीपावली की पूजा व्यक्ति के मन में सकारात्मक ऊर्जा, आत्मविश्वास और प्रसन्नता लाती है।
- जब परिवार एक साथ दीप जलाते हैं और पूजा करते हैं, तो यह पारिवारिक एकता का प्रतीक बनता है।
- समाज में भी दीपावली का पर्व प्रेम, सहयोग और दान की भावना को प्रबल करता है।
इस दिन जरूरतमंदों की सहायता करने से पुण्यफल कई गुना बढ़ता है।
5. कर्म और आध्यात्मिक उन्नति का संदेश
- लक्ष्मी जी की कृपा केवल बाहरी धन से नहीं, बल्कि कर्मठता और ईमानदारी से जुड़ी होती है।
जो व्यक्ति परिश्रम करता है, न्यायपूर्वक अर्जन करता है, और दूसरों की भलाई में धन का उपयोग करता है, उसी पर स्थायी लक्ष्मी की कृपा रहती है। - गणेश जी की कृपा से व्यक्ति को सही निर्णय लेने की क्षमता और संकट में धैर्य मिलता है।
- अतः दीपावली की पूजा हमें यह सिखाती है कि —
धन और ज्ञान, दोनों का संतुलन ही जीवन की पूर्णता है।
6. आध्यात्मिक लाभ (दीर्घकालिक प्रभाव)
- नियमित रूप से दीपावली पर गणेश–लक्ष्मी पूजन करने से व्यक्ति के जीवन में धन, ज्ञान, स्वास्थ्य और सौभाग्य का स्थायी वास होता है।
- यह पूजा कर्मफल की शुद्धि लाती है, नकारात्मक ग्रह प्रभाव कम करती है।
- ध्यान और मंत्रोच्चारण से मन शांत होता है, जिससे व्यक्ति का आत्मबल और एकाग्रता बढ़ती है।
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