कलियुग के जाग्रत देव: हनुमान जी
1. कलियुग में हनुमान जी का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कलियुग में धर्म की शक्ति अपेक्षाकृत कम और अधर्म की प्रवृत्तियाँ अधिक होती हैं। ऐसे समय में हनुमान जी की उपासना विशेष फलदायी मानी गई है क्योंकि—
- वे अजर-अमर माने जाते हैं।
- वे श्रीराम के अनन्य भक्त हैं और राम नाम का प्रचार करते हैं।
- वे शक्ति, साहस और भक्ति के सजीव प्रतीक हैं।
मान्यता है कि जहां भी राम कथा या राम नाम का कीर्तन होता है, वहां हनुमान जी अदृश्य रूप से उपस्थित रहते हैं।
2. शास्त्रों में प्रमाण
महाकाव्य रामायण में हनुमान जी की महिमा विस्तार से वर्णित है।
इसके अतिरिक्त रामचरितमानस में गोस्वामी तुलसीदास जी ने उन्हें “संकटमोचन” और “अतुलित बलधामा” कहा है।
इन ग्रंथों में वर्णित प्रसंग—
- समुद्र लांघना
- लंका दहन
- संजीवनी बूटी लाना
यह दर्शाते हैं कि वे असंभव को संभव करने वाले देवता हैं।
3. जाग्रत देव क्यों कहलाते हैं?
(1) शीघ्र कृपा करने वाले
भक्तों का अनुभव है कि हनुमान जी शीघ्र प्रसन्न होते हैं और सच्ची श्रद्धा पर तुरंत आशीर्वाद देते हैं।
(2) भय और बाधा का नाश
उनका स्मरण करते ही मन में साहस का संचार होता है। इसलिए उन्हें “संकटमोचन” कहा जाता है।
(3) ग्रहदोष और नकारात्मकता से रक्षा
लोकमान्यता है कि हनुमान भक्ति से शनि और अन्य ग्रहों के दुष्प्रभाव कम होते हैं।
(4) सतत उपस्थिति की भावना
भक्तों को विश्वास है कि हनुमान जी आज भी पृथ्वी पर विचरण करते हैं और धर्म की रक्षा करते हैं।
4. हनुमान भक्ति के आध्यात्मिक लाभ
- मानसिक शांति
- आत्मविश्वास में वृद्धि
- साहस और धैर्य
- नकारात्मक विचारों से मुक्ति
- लक्ष्य के प्रति समर्पण
हनुमान जी की भक्ति व्यक्ति को कर्मयोगी बनाती है—अर्थात वह केवल प्रार्थना ही नहीं करता, बल्कि परिश्रम और सेवा का मार्ग भी अपनाता है।
5. आराधना के प्रमुख उपाय
- मंगलवार और शनिवार को विशेष पूजा
- हनुमान चालीसा का नियमित पाठ
- “ॐ हनुमते नमः” मंत्र का जप
- राम नाम का स्मरण
- सेवा, दान और सत्कर्म
6. आधुनिक युग में प्रासंगिकता
आज के समय में तनाव, प्रतिस्पर्धा और असुरक्षा की भावना बढ़ रही है। ऐसे में हनुमान जी की भक्ति व्यक्ति को आंतरिक शक्ति और सकारात्मक दृष्टिकोण देती है। यह भक्ति केवल चमत्कार की आशा नहीं, बल्कि आत्मबल जगाने का माध्यम है।
हनुमान जी हमें सिखाते हैं—
- विनम्र रहकर भी महान कार्य किए जा सकते हैं।
- सच्ची शक्ति सेवा और समर्पण में निहित है।
- ईश्वर भक्ति के साथ कर्म करना ही सफलता का मार्ग है।
निष्कर्ष
कलियुग में हनुमान जी को जाग्रत देव इसलिए कहा जाता है क्योंकि वे आज भी भक्तों के जीवन में आशा, साहस और सुरक्षा का संचार करते हैं। उनका नाम, उनका स्मरण और उनकी भक्ति व्यक्ति को भीतर से मजबूत बनाती है।
जब मन में विश्वास, कर्म में निष्ठा और हृदय में हनुमान का नाम हो—तब कोई भी संकट स्थायी नहीं रहता।
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