आमला एकादशी व्रत कैसे करें – सरल और सही तरीका
आमला एकादशी फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाती है। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है और इस दिन आंवला (आमला) वृक्ष की पूजा का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि इस दिन आंवला वृक्ष में स्वयं भगवान विष्णु का वास होता है।
🪔 व्रत का महत्व
- इस व्रत से पापों का नाश होता है।
- मोक्ष की प्राप्ति और सौभाग्य की वृद्धि होती है।
- घर में सुख-शांति और समृद्धि आती है।
📿 पूजा सामग्री
- आंवला (आमला) या आंवला वृक्ष
- भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र
- पीला वस्त्र
- तुलसी दल
- रोली, चावल (अक्षत)
- धूप, दीप, अगरबत्ती
- फल, मिष्ठान
- पंचामृत
- गंगाजल
- नारियल
🌅 व्रत और पूजा विधि (स्टेप बाय स्टेप)
1️⃣ प्रातःकालीन तैयारी
- ब्रह्म मुहूर्त में उठें।
- स्नान कर स्वच्छ पीले वस्त्र धारण करें।
- व्रत का संकल्प लें – “मैं श्रद्धा पूर्वक आमला एकादशी व्रत करूँगा/करूँगी।”
2️⃣ भगवान विष्णु पूजन
- पूजा स्थान पर भगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित करें।
- गंगाजल से शुद्धि करें।
- रोली, अक्षत, पुष्प अर्पित करें।
- तुलसी दल अवश्य चढ़ाएँ।
- धूप-दीप जलाएँ।
- विष्णु मंत्र का जप करें:
“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय”
3️⃣ आंवला वृक्ष की पूजा
- आंवला वृक्ष के नीचे साफ स्थान बनाएं।
- जल, रोली, चावल और पुष्प अर्पित करें।
- कच्चा सूत (मौली) वृक्ष के चारों ओर बांधें।
- वृक्ष की 7 या 11 परिक्रमा करें।
- घी का दीपक जलाएं।
4️⃣ व्रत कथा श्रवण
इस दिन आमला एकादशी की कथा सुनना या पढ़ना अनिवार्य माना जाता है। कथा में राजा चित्ररथ और उनके राज्य की महिमा का वर्णन आता है, जहाँ आमला एकादशी व्रत से सभी को पुण्य फल प्राप्त हुआ।
5️⃣ आरती
भगवान विष्णु की आरती करें और प्रसाद वितरण करें।
🍎 व्रत नियम
- इस दिन अन्न का त्याग करें (फलाहार कर सकते हैं)।
- लहसुन, प्याज और तामसिक भोजन न लें।
- ब्रह्मचर्य का पालन करें।
- क्रोध और झूठ से दूर रहें।
🌙 पारण विधि (अगले दिन)
- द्वादशी तिथि में शुभ मुहूर्त में व्रत का पारण करें।
- ब्राह्मण या जरूरतमंद को भोजन कराएँ।
- दान-दक्षिणा दें।
✨ व्रत के लाभ
- सभी कष्ट दूर होते हैं।
- विष्णु कृपा प्राप्त होती है।
- पितरों की शांति होती है।
- सौभाग्य और समृद्धि बढ़ती है।
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