अमला एकादशी व्रत कैसे खोलें? पारण की सही विधि
अमला एकादशी का व्रत जितना महत्वपूर्ण है, उतना ही महत्वपूर्ण है उसका सही समय पर पारण (व्रत खोलना)। शास्त्रों के अनुसार द्वादशी तिथि में विधिपूर्वक पारण करना आवश्यक होता है।
🕉️ पारण का सही समय
- व्रत हमेशा द्वादशी तिथि में खोला जाता है।
- सूर्योदय के बाद और द्वादशी तिथि समाप्त होने से पहले पारण करना चाहिए।
- हर वर्ष पारण का समय पंचांग के अनुसार अलग-अलग होता है, इसलिए स्थानीय पंचांग अवश्य देखें।
- हरिवासर (द्वादशी का प्रारंभिक भाग) में पारण नहीं करना चाहिए।
🪔 पारण की सही विधि (Step-by-Step)
1️⃣ सुबह स्नान और पूजा
द्वादशी के दिन प्रातः स्नान करें और भगवान विष्णु की पुनः पूजा करें। दीप, धूप और तुलसी अर्पित करें।
2️⃣ भगवान को भोग लगाएं
सात्विक भोजन जैसे खीर, फल या मीठा भोग लगाएं। तुलसी दल अवश्य अर्पित करें।
3️⃣ दान करें
ब्राह्मण, गरीब या जरूरतमंद को अन्न, वस्त्र, फल या दक्षिणा दान दें।
आंवला (आमलकी) का दान भी शुभ माना जाता है।
4️⃣ जल ग्रहण करके पारण
सबसे पहले जल ग्रहण करें। कई परंपराओं में तुलसी मिला जल पीकर व्रत खोला जाता है।
5️⃣ सात्विक भोजन करें
- फल, दूध या हल्का भोजन लें।
- चावल का सेवन कुछ परंपराओं में पारण के बाद किया जाता है।
- तामसिक भोजन (प्याज, लहसुन आदि) से बचें।
⚠️ पारण करते समय ध्यान रखें
✔️ पारण द्वादशी तिथि में ही करें।
✔️ क्रोध, विवाद और नकारात्मक विचारों से दूर रहें।
✔️ व्रत तोड़ने से पहले भगवान का स्मरण अवश्य करें।
✔️ संभव हो तो ब्राह्मण भोजन कराकर ही स्वयं भोजन करें।
🌿 पारण का महत्व
- सही समय पर पारण करने से व्रत का पूर्ण फल मिलता है।
- भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
- घर में सुख-शांति और समृद्धि आती है।
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