अमला एकादशी व्रत की पौराणिक कथा
पद्म पुराण के अनुसार प्राचीन समय में वैदिशा नामक नगर में एक धर्मपरायण राजा राज्य करता था। वह राजा और उसकी प्रजा सभी भगवान विष्णु के अनन्य भक्त थे और विधिपूर्वक एकादशी का व्रत करते थे।
फाल्गुन शुक्ल एकादशी के दिन राजा ने नगरवासियों के साथ आंवले के वृक्ष के नीचे भगवान विष्णु की पूजा की। सभी ने व्रत रखा, भजन-कीर्तन किया और रात्रि जागरण किया।
उसी रात एक शिकारी, जो अत्यंत पापी जीवन जी रहा था, भूख-प्यास से व्याकुल होकर उसी स्थान पर आ गया। उसने भी अनजाने में पूरी रात जागरण किया और भगवान का कीर्तन सुनता रहा। अगले दिन वह अपने घर चला गया, पर कुछ समय बाद उसकी मृत्यु हो गई।
व्रत और जागरण के प्रभाव से अगले जन्म में वही शिकारी एक राजा के रूप में जन्मा। वह अत्यंत धर्मात्मा और प्रतापी शासक बना। एक दिन शत्रुओं ने उस पर आक्रमण किया, परंतु भगवान विष्णु की कृपा से एक दिव्य स्त्री प्रकट हुई और उसने शत्रुओं का नाश कर दिया। तब राजा को स्मरण हुआ कि पूर्व जन्म में अमला एकादशी के व्रत का ही फल उसे प्राप्त हुआ है।
कथा का संदेश:
अमला एकादशी का व्रत श्रद्धा से करने या अनजाने में भी इसका पुण्य प्राप्त करने से पापों का नाश होता है और भगवान विष्णु की विशेष कृपा मिलती है।
अमला एकादशी का धार्मिक महत्व
- यह व्रत मोक्ष प्रदान करने वाला माना गया है।
- आंवले का वृक्ष पवित्र और आयुर्वेदिक गुणों से भरपूर माना जाता है।
- मान्यता है कि इस दिन आंवले के वृक्ष की पूजा करने से हजारों अश्वमेध यज्ञ के बराबर फल मिलता है।
- पितृ दोष और पूर्व जन्म के पापों से मुक्ति मिलती है।
अमला एकादशी 2026 पूजा विधि (विस्तार से)
1️⃣ व्रत का संकल्प
- प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें।
- स्वच्छ वस्त्र धारण कर भगवान विष्णु का ध्यान करें।
- व्रत का संकल्प लें — “मैं अमला एकादशी का व्रत श्रद्धा और नियम से करूँगा/करूँगी।”
2️⃣ पूजन की तैयारी
- पूजा स्थान पर भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
- पीला वस्त्र, तुलसी दल, चंदन, अक्षत, धूप, दीप, फल, पंचामृत आदि रखें।
- यदि संभव हो तो आंवले के वृक्ष के नीचे पूजा करें।
3️⃣ आंवला पूजन विधि
- आंवले के वृक्ष पर जल अर्पित करें।
- कच्चा सूत या मौली बांधें।
- दीपक जलाएं और परिक्रमा करें।
- “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का 108 बार जाप करें।
4️⃣ व्रत के नियम
- इस दिन अन्न का त्याग करें।
- फलाहार या निर्जला व्रत रखा जा सकता है।
- क्रोध, झूठ और नकारात्मक विचारों से दूर रहें।
- रात्रि में भजन-कीर्तन और जागरण करें।
5️⃣ व्रत पारण
- द्वादशी तिथि में सूर्योदय के बाद व्रत का पारण करें।
- ब्राह्मण या जरूरतमंद को दान दें।
- सात्विक भोजन ग्रहण करें।
अमला एकादशी व्रत के लाभ
- पापों का नाश
- संतान सुख की प्राप्ति
- धन-धान्य में वृद्धि
- मानसिक शांति
- भगवान विष्णु की कृपा और मोक्ष की प्राप्ति
विशेष मंत्र
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
ॐ विष्णवे नमः
श्री हरि विष्णुाय नमः
