संकटमोचन की भक्ति से मिटते हैं हर कष्ट
संकटमोचन की भक्ति से मिटते हैं हर कष्ट
(विस्तृत विवरण)
संकटमोचन हनुमान जी केवल अपार बल और पराक्रम के प्रतीक ही नहीं हैं, बल्कि वे करुणा, सेवा और निस्वार्थ भक्ति के जीवंत स्वरूप भी हैं। शास्त्रों और लोकमान्यता के अनुसार, जहाँ सच्चे मन से हनुमान जी की भक्ति की जाती है, वहाँ संकट टिक नहीं पाते। उनके नाम-स्मरण मात्र से भय, शोक और बाधाएँ दूर होने लगती हैं।
हनुमान जी को संकटमोचन इसलिए कहा जाता है क्योंकि वे भक्तों के जीवन में आने वाले हर प्रकार के संकट—चाहे वह शारीरिक हो, मानसिक हो, पारिवारिक हो या आध्यात्मिक—का नाश करते हैं। वे भक्त की परीक्षा अवश्य लेते हैं, पर उसे कभी अकेला नहीं छोड़ते। जब व्यक्ति पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ हनुमान जी का स्मरण करता है, तो उसे भीतर से एक अद्भुत शक्ति और साहस प्राप्त होता है।
मानसिक कष्टों से मुक्ति
आज के युग में चिंता, भय, तनाव और निराशा आम समस्याएँ हैं। हनुमान जी की भक्ति मन को स्थिर करती है। हनुमान चालीसा का नियमित पाठ नकारात्मक विचारों को दूर कर मन में सकारात्मक ऊर्जा भर देता है। इससे आत्मविश्वास बढ़ता है और व्यक्ति कठिन परिस्थितियों का सामना धैर्यपूर्वक कर पाता है।
शारीरिक और बाहरी संकटों का नाश
शास्त्रों में वर्णन है कि हनुमान जी ने असंभव कार्यों को संभव किया—समुद्र लांघना, संजीवनी लाना, रावण की लंका को हिला देना। यह सब उनके बल के साथ-साथ रामभक्ति का परिणाम था। उनकी भक्ति करने वाला व्यक्ति भी अपने जीवन की बड़ी से बड़ी बाधाओं से पार पा सकता है। रोग, भय और शत्रुजनित संकट धीरे-धीरे समाप्त होने लगते हैं।
आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग
हनुमान जी की भक्ति व्यक्ति को अहंकार से मुक्त करती है। वे स्वयं सर्वशक्तिमान होकर भी स्वयं को राम का दास मानते थे। यही भाव भक्त के भीतर विनम्रता, सेवा और समर्पण का विकास करता है। संकटमोचन की भक्ति से व्यक्ति का मन प्रभु के चरणों में स्थिर होता है और जीवन का सही उद्देश्य समझ में आने लगता है।
भक्ति का सच्चा फल
संकटमोचन की भक्ति केवल संकट दूर करने का साधन नहीं है, बल्कि यह जीवन को सही दिशा देने का मार्ग है। जब भक्त सच्चे मन से “जय हनुमान” का स्मरण करता है, तो हनुमान जी उसकी रक्षा स्वयं करते हैं। वे भक्त को शक्ति देते हैं, सही निर्णय लेने की बुद्धि देते हैं और हर कठिन समय में अदृश्य रूप से साथ निभाते हैं।
अंततः कहा जा सकता है कि जहाँ सच्ची हनुमान भक्ति है, वहाँ संकट टिक नहीं सकता। श्रद्धा, विश्वास और निरंतर स्मरण ही वह कुंजी है जिससे संकटमोचन की कृपा प्राप्त होती है और जीवन के हर कष्ट का नाश होता है।
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