शाम को दीपक कैसे जलाएं
शाम को दीपक जलाने की सही विधि (विस्तृत विवरण)
दीपक जलाने का शुभ समय
- सूर्यास्त के बाद दीपक जलाना सबसे शुभ माना गया है।
- सामान्यतः शाम 5:30 से 7:30 बजे के बीच दीपक जलाना उत्तम रहता है।
- दीपक पूजा के समय या संध्या आरती से पहले अवश्य जलाना चाहिए।
दीपक जलाने से पहले क्या करें
- घर की साफ-सफाई करें, विशेषकर मंदिर और मुख्य द्वार।
- स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें।
- मन को शांत रखें, नकारात्मक विचार न लाएं।
- मंदिर या पूजा स्थान को गंगाजल या स्वच्छ जल से शुद्ध करें।
दीपक किसका और किस तेल का हो
- मिट्टी का दीपक सबसे श्रेष्ठ माना गया है।
- घी का दीपक – देवी-देवताओं के लिए उत्तम।
- सरसों के तेल का दीपक – नकारात्मक ऊर्जा दूर करने के लिए।
- तिल के तेल का दीपक – शनि दोष, बाधा और कष्ट शांति हेतु।
- कपास की बाती प्रयोग करें।
दीपक जलाने की सही दिशा
- दीपक पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके जलाएं।
- मंदिर में दीपक देवताओं के सामने रखें।
- घर के मुख्य द्वार पर एक दीपक अवश्य जलाएं, यह लक्ष्मी आगमन का संकेत है।
दीपक जलाने की विधि
- दीपक में तेल/घी डालें।
- बाती को अच्छी तरह भिगोकर रखें।
- पहले अगरबत्ती या धूप जलाएं।
- दीपक जलाकर शुद्ध मंत्र बोलें— “ॐ दीपज्योति नमः”
या
“ॐ नमो लक्ष्मीनारायणाय नमः” - भगवान को दीपक अर्पित कर आरती करें।
शाम को दीपक जलाने के लाभ
- घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
- माँ लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है।
- आर्थिक तंगी, क्लेश और दरिद्रता दूर होती है।
- नकारात्मक शक्तियाँ और वास्तु दोष शांत होते हैं।
- मन को शांति और परिवार में सुख-समृद्धि आती है।
दीपक जलाते समय ये गलतियाँ न करें
- खंडित या टूटा दीपक न जलाएं।
- बुझे हुए दीपक को दोबारा बिना साफ किए न जलाएं।
- दीपक को फूंक मारकर न बुझाएं।
- अशुद्ध मन या गंदे स्थान पर दीपक न जलाएं।
विशेष नियम (शुक्रवार और अमावस्या)
- शुक्रवार को घी का दीपक माँ लक्ष्मी के लिए अवश्य जलाएं।
- अमावस्या की शाम पीपल के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाना अत्यंत फलदायी होता है।
निष्कर्ष
शाम को दीपक जलाना केवल परंपरा नहीं, बल्कि आस्था, ऊर्जा और शुद्धता का पवित्र उपाय है। इसे प्रतिदिन श्रद्धा से करने पर जीवन में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है।
हनुमान व्रत से जीवन में सुख-शांति
