लक्ष्मी पूजन 2025: दिवाली पर करें मां लक्ष्मी को प्रसन्न
दिवाली का पर्व धन, सौभाग्य और समृद्धि का प्रतीक है। इस दिन मां लक्ष्मी, भगवान विष्णु और भगवान गणेश की पूजा विशेष रूप से की जाती है। ऐसा माना जाता है कि इस पवित्र रात्रि में मां लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और जो घर स्वच्छ, प्रकाशमान और भक्ति से भरा होता है, वहां स्थायी रूप से निवास करती हैं। इसलिए लक्ष्मी पूजन का महत्व हर घर में विशेष होता है।
लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त 2025
दिवाली का त्योहार 20 अक्टूबर 2025 (सोमवार) को मनाया जाएगा।
इस दिन प्रदोष काल और स्थिर लग्न (वृषभ लग्न) में लक्ष्मी पूजन अत्यंत शुभ माना गया है।
शुभ मुहूर्त: शाम 06:55 बजे से रात 08:45 बजे तक
(मुहूर्त स्थान के अनुसार थोड़ा भिन्न हो सकता है।)
लक्ष्मी पूजन की विधि
- घर की सफाई और सजावट करें:
दिवाली से पहले घर की पूरी तरह सफाई करें और दीयों, फूलों, तोरण और रंगोली से सजाएं।
मां लक्ष्मी स्वच्छ और प्रकाशमान घर में ही प्रवेश करती हैं। - पूजन स्थल तैयार करें:
पूजन के लिए उत्तर दिशा या पूर्व दिशा में लकड़ी की चौकी पर लाल या पीले कपड़े बिछाएं।
उस पर मां लक्ष्मी, भगवान गणेश और कुबेर देव की मूर्ति स्थापित करें। - स्नान और संकल्प:
स्वयं स्नान कर शुद्ध वस्त्र धारण करें और पूजा शुरू करने से पहले संकल्प लें —
“मैं श्रद्धा और भक्ति से मां लक्ष्मी की पूजा कर रहा/रही हूं, कृपया मुझे धन, स्वास्थ्य और सुख प्रदान करें।” - दीप प्रज्वलन:
शुद्ध घी या तिल के तेल का दीपक जलाएं और उसे पूजन स्थल पर रखें। - पूजन सामग्री अर्पित करें:
मां लक्ष्मी को कमल का फूल, पान, सुपारी, धूप, दीप, कुमकुम, चावल और मिठाई अर्पित करें।
भगवान गणेश को मोदक और दूर्वा चढ़ाएं। - कुबेर पूजन:
लक्ष्मी पूजन के साथ धन के देवता कुबेर की भी आराधना करें, ताकि धन स्थायी रूप से घर में टिके। - आरती और मंत्र:
मां लक्ष्मी की आरती करें और यह मंत्र अवश्य पढ़ें: “ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः।”
“ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्म्यै नमः।”
लक्ष्मी पूजन के लाभ
- घर में धन, वैभव और समृद्धि का आगमन होता है।
- व्यापार में वृद्धि और नौकरी में उन्नति के योग बनते हैं।
- परिवार में सुख-शांति और आपसी प्रेम बढ़ता है।
- नकारात्मक ऊर्जा और दरिद्रता का नाश होता है।
विशेष सुझाव
- पूजन के दिन झाड़ू या कूड़ा घर से बाहर न फेंकें।
- लक्ष्मी जी के चरणों की प्रतीकात्मक छाप (आटे या कुमकुम से) द्वार पर बनाएं।
- पूजा के बाद दीपक पूरी रात जलने दें, यह अत्यंत शुभ होता है।
- इस दिन किसी का अपमान न करें और मधुर वाणी बोलें।
निष्कर्ष
दिवाली की रात्रि केवल दीप जलाने का नहीं, बल्कि आत्मिक शुद्धता, कृतज्ञता और सकारात्मकता का संदेश देती है। जब हम श्रद्धा और सच्चे मन से मां लक्ष्मी की पूजा करते हैं, तो घर में न केवल धन की, बल्कि आनंद और संतोष की भी वर्षा होती है।
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