माता संतोषी का चमत्कारी व्रत
- यह व्रत शुक्रवार को किया जाता है।
- सामान्यतः 16 शुक्रवार का व्रत अत्यंत फलदायी माना जाता है।
- कुछ भक्त 21 या 32 शुक्रवार तक भी यह व्रत रखते हैं।
- व्रत का आरंभ किसी भी मास के शुक्ल पक्ष के शुक्रवार से किया जा सकता है।
माता संतोषी व्रत की पूजा विधि
प्रातःकालीन विधि
- सूर्योदय से पूर्व स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें।
- पूजा स्थान की सफाई कर माता संतोषी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
- दीपक जलाकर माता का ध्यान करें।
- माता को गुड़ और भुने हुए चने का भोग अर्पित करें।
- लाल या पीले पुष्प चढ़ाएँ।
📿 मंत्र और कथा
- “ॐ संतोषी मातायै नमः” मंत्र का 108 बार जाप करें।
- माता संतोषी की व्रत कथा श्रद्धा से पढ़ें या सुनें।
सायंकालीन पूजा
- पुनः दीपक जलाकर माता की आरती करें।
- प्रसाद परिवार में बाँटें।
🚫 चमत्कारी व्रत के कठोर नियम
- व्रत के दिन किसी भी प्रकार का खट्टा पदार्थ पूर्णतः निषिद्ध है।
(नींबू, इमली, दही, अचार, सिरका आदि) - भोजन सात्विक हो।
- क्रोध, ईर्ष्या, निंदा और असत्य से दूर रहें।
- पूरे व्रत काल में संतोष और धैर्य बनाए रखें।
📖 माता संतोषी की चमत्कारी व्रत कथा (भावार्थ)
एक निर्धन स्त्री ने माता संतोषी का व्रत आरंभ किया। उसे अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, पर उसने खट्टा त्यागे रखा और नियम नहीं तोड़े। माता ने उसकी परीक्षा ली, किंतु अंततः उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर उसे धन, मान-सम्मान और सुख प्रदान किया। यही कारण है कि इस व्रत को चमत्कारी कहा जाता है।
✨ माता संतोषी के चमत्कार
- असंभव लगने वाले कार्य सफल हो जाते हैं
- आर्थिक संकट दूर होते हैं
- विवाह में आ रही बाधाएँ समाप्त होती हैं
- संतान सुख प्राप्त होता है
- परिवार में प्रेम और शांति बढ़ती है
- रोग और मानसिक तनाव कम होता है
🎁 व्रत का उद्यापन (समापन विधि)
- अंतिम शुक्रवार को उद्यापन करें।
- गुड़-चना, खीर या मीठा भोजन बनाएं।
- कन्याओं या ब्राह्मण को भोजन कराएँ।
- दान-पुण्य करें और माता का धन्यवाद करें।
🌸 व्रत का आध्यात्मिक संदेश
संतोष ही सबसे बड़ा धन है, और संतोषी माता उसकी अधिष्ठात्री देवी हैं।
🙏 निष्कर्ष
माता संतोषी का चमत्कारी व्रत केवल इच्छापूर्ति का माध्यम नहीं है, बल्कि यह हमें धैर्य, संयम, संतोष और सच्ची श्रद्धा का मार्ग सिखाता है। जो भक्त पूर्ण विश्वास से इस व्रत को करता है, माता उसकी जीवन-नैया पार लगा देती हैं।
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