बृहस्पति व्रत कितने समय तक करना चाहिए
- 16 गुरुवार का व्रत
सबसे अधिक प्रचलित है। विवाह, संतान सुख, धन और गुरु कृपा के लिए किया जाता है। - 21 गुरुवार का व्रत
विशेष मनोकामना, गुरु दोष शांति और जीवन में स्थिरता के लिए माना जाता है। - एक वर्ष तक
कुछ भक्त पूरे एक वर्ष (लगभग 48–52 गुरुवार) तक यह व्रत करते हैं। - मनोकामना पूर्ण होने तक
कई लोग किसी विशेष इच्छा की पूर्ति तक व्रत करते हैं और बाद में उद्यापन करते हैं।
व्रत आरंभ करने का शुभ समय
- शुक्ल पक्ष का गुरुवार सबसे उत्तम माना जाता है।
- यदि संभव हो तो व्रत को गुरु पुष्य योग या शुभ मुहूर्त में आरंभ करें।
उद्यापन करना आवश्यक है
व्रत पूर्ण होने पर बृहस्पति देव की पूजा, कथा पाठ, दान और ब्राह्मण भोजन कराकर उद्यापन करना चाहिए।
बृहस्पति व्रत कितने समय तक करना चाहिए
- गुरु कृपा प्राप्त होती है
- कुंडली में बृहस्पति ग्रह मजबूत होता है
- गुरु दोष के प्रभाव कम होते हैं
- धन, वैभव और समृद्धि में वृद्धि होती है
- विवाह में आ रही बाधाएँ दूर होती हैं
- संतान सुख की प्राप्ति होती है
- शिक्षा, ज्ञान और बुद्धि का विकास होता है
- भाग्य का साथ मिलने लगता है
- नौकरी और व्यापार में उन्नति होती है
- समाज में मान-सम्मान बढ़ता है
- मानसिक तनाव और भ्रम कम होते हैं
- घर में सुख-शांति और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है
- धर्म, सत्य और सदाचार की भावना बढ़ती है
- आर्थिक परेशानियों से राहत मिलती है
- जीवन में स्थिरता और आत्मविश्वास आता है
हनुमान व्रत से जीवन में सुख-शांति
