पुत्रदा एकादशी पौष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाई जाती है। यह व्रत विशेष रूप से उन दंपत्तियों द्वारा रखा जाता है जो संतान प्राप्ति की इच्छा रखते हैं। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष पूजा की जाती है।
व्रत का महत्व:
- यह व्रत संतान सुख और परिवार में समृद्धि लाने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
- पुत्रदा एकादशी को रखने से कष्ट और पापों का नाश होता है।
- इस दिन व्रती भगवान विष्णु के साथ-साथ सुर्य देव और माता लक्ष्मी की भी आराधना करते हैं।
व्रत की विधि:
- सुबह स्नान करके साफ वस्त्र धारण करें।
- तुलसी, केसर और दही का मिश्रण कर भगवान विष्णु की पूजा करें।
- तुलसी के पत्ते, फल, मिठाई और हलवा चढ़ाएं।
- व्रती संपूर्ण दिन व्रत रखे और सात्विक भोजन करें।
- कथा सुनना या पढ़ना जैसे कि “पुत्रदा एकादशी कथा” से व्रत की महिमा बढ़ती है।
- अगले दिन पारण (उपवास तोड़ना) शुभ समय में करें।
व्रत का समय (2025 में):
- व्रत प्रारंभ: 30 दिसंबर 2025 सुबह
- व्रत समाप्त: 31 दिसंबर 2025 सुबह
- पारण समय: 31 दिसंबर 2025 दोपहर
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