दिवाली की रात भूल से भी ना करें ये गलतियां
1. झगड़ा या नकारात्मक बातें ना करें
दिवाली की रात को घर में तनाव, गुस्सा या बहस करने से लक्ष्मीजी का आगमन रुक सकता है।
कोशिश करें कि घर में शांति और खुशी का माहौल बना रहे।
2. दीपक बुझने न दें
दीपावली की रात जलाए गए दीपक को बुझने न दें, यह अशुभ माना जाता है।
यदि हवा चल रही हो तो दीपक को सुरक्षित स्थान पर रखें।
3. झाड़ू या सफाई का सामान न छुएं
लक्ष्मी पूजन के बाद झाड़ू लगाना या कचरा फेंकना अशुभ माना जाता है।
ऐसा करने से घर की लक्ष्मी चली जाती है, ऐसा विश्वास है।
4. किसी को पैसे या अनाज उधार न दें
दिवाली की रात धन या अनाज देना आर्थिक नुकसान और दरिद्रता का संकेत माना जाता है।
कोशिश करें कि उधार अगले दिन ही दें।
5. घर के अंधेरे को नजरअंदाज न करें
घर के किसी भी कोने को अंधेरे में न छोड़ें।
माना जाता है कि जहां रोशनी होती है, वहीं लक्ष्मीजी का वास होता है।
6. लक्ष्मी पूजा अधूरी न छोड़ें
पूजन करते समय बीच में उठना या अधूरा छोड़ना अशुभ माना जाता है।
पूरी श्रद्धा और ध्यान से पूजन करें।
7. रात को बासी खाना न खाएं
दिवाली की रात ताज़ा और सात्विक भोजन करें।
बासी या मांसाहारी भोजन इस दिन से बचना चाहिए।
8. पटाखों से सावधानी रखें
बेफिजूल पटाखे जलाने से प्रदूषण और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ता है।
पर्यावरण-हितैषी दीवाली मनाएं।
9. घर में झाड़ू को उल्टा न रखें
यह आर्थिक हानि का प्रतीक माना जाता है।
झाड़ू को सीधा और साफ स्थान पर रखें।
10. देर रात सोने से पहले प्रार्थना अवश्य करें
दिनभर की भागदौड़ के बाद सोने से पहले माँ लक्ष्मी और गणेश जी से प्रार्थना करें कि घर में सदैव सुख-समृद्धि बनी रहे।
1. दिवाली का धार्मिक महत्व
दिवाली भारत के सबसे पवित्र और प्राचीन त्योहारों में से एक है। यह अच्छाई पर बुराई की विजय और प्रकाश पर अंधकार की जीत का प्रतीक है।
- हिंदू धर्म में, यह दिन भगवान श्रीराम के 14 वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या लौटने की स्मृति में मनाया जाता है। अयोध्यावासियों ने दीप जलाकर उनका स्वागत किया था, इसलिए इसे “दीपावली” कहा गया।
- जैन धर्म में, यह दिन भगवान महावीर स्वामी के निर्वाण दिवस के रूप में मनाया जाता है।
- सिख धर्म में, यह दिन गुरु हरगोबिंद सिंह जी के जेल से मुक्ति पाने की याद में “बंदी छोड़ दिवस” के रूप में मनाया जाता है।
- आर्य समाज के अनुसार, इसी दिन महर्षि दयानंद सरस्वती का निर्वाण हुआ था।
इस तरह, यह पर्व अनेक धर्मों में एकता और प्रकाश का प्रतीक बनकर उभरता है।
2. आध्यात्मिक महत्व
दिवाली केवल बाहरी रोशनी का त्योहार नहीं है, बल्कि आंतरिक अंधकार मिटाने का प्रतीक भी है।
- यह हमें सिखाती है कि जैसे दीपक अंधकार को दूर करता है, वैसे ही ज्ञान, सदाचार और प्रेम से जीवन के नकारात्मक विचारों को दूर किया जा सकता है।
- यह समय आत्म-चिंतन, कृतज्ञता और नई शुरुआत का अवसर प्रदान करता है।
- लक्ष्मी पूजन हमें यह संदेश देता है कि धन के साथ धर्म का संतुलन रखना जरूरी है।
3. सामाजिक और पारिवारिक महत्व
दिवाली परिवार और समाज को जोड़ने वाला पर्व है।
- इस दिन घर की सफाई, सजावट और रोशनी के माध्यम से एक सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
- लोग एक-दूसरे से मिलते हैं, उपहार देते हैं, मिठाई बाँटते हैं, जिससे रिश्तों में मिठास आती है।
- समाज में सहयोग, दया और सौहार्द की भावना बढ़ती है।
4. आर्थिक और व्यावसायिक लाभ
दिवाली का भारत की अर्थव्यवस्था पर भी गहरा प्रभाव पड़ता है।
- यह व्यापारिक वर्ष का आरंभ होता है — व्यापारी अपने नए हिसाब-किताब की शुरुआत लक्ष्मी पूजन के साथ करते हैं।
- बाजारों में खरीदारी का माहौल रहता है — नए कपड़े, गहने, वाहन, उपहार और सजावट की वस्तुएँ बिकती हैं।
- इससे रोज़गार और उत्पादन दोनों में वृद्धि होती है, जिससे आर्थिक गतिविधियाँ तेज़ होती हैं।
5. पर्यावरण और स्वच्छता से जुड़ा महत्व
दिवाली से पहले घर की सफाई और सजावट का जो परंपरागत चलन है, उसका व्यावहारिक पक्ष भी है।
- सफाई से घर में स्वास्थ्य और स्वच्छता बनी रहती है।
- दीयों की रौशनी से ऊर्जा और सकारात्मकता का वातावरण बनता है।
- आजकल लोग ईको-फ्रेंडली दीवाली मनाने की दिशा में भी बढ़ रहे हैं — जो पर्यावरण संरक्षण का संदेश देता है।
6. सांस्कृतिक और भावनात्मक महत्व
दिवाली हमें अपनी संस्कृति, परंपरा और मूल्यों से जोड़ती है।
- यह त्योहार रंगोली, दीप सज्जा, पूजा-पाठ, और पारंपरिक व्यंजन के माध्यम से भारतीय संस्कृति का सुंदर रूप दिखाता है।
- यह दिन लोगों को खुशियाँ बाँटने, दान करने और क्षमा करने का अवसर देता है।
- यह नई शुरुआत, आशा और समृद्धि का प्रतीक है।
निष्कर्ष
दिवाली केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि एक जीवन-दर्शन है।
यह हमें सिखाती है कि जैसे दीपक अपने चारों ओर अंधकार मिटाता है, वैसे ही हमें भी अपने जीवन में नेकी, प्रेम और प्रकाश फैलाना चाहिए।
इस दिन हम न केवल अपने घर को, बल्कि अपने मन और विचारों को भी उजाला करने का संकल्प लेते हैं।
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